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गुरुवार, 10 जून, 2004 को 07:37 GMT तक के समाचार
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'अमरीकी नीति के तहत हुआ दुर्व्यवहार'
इराक़ी बंदी
इराक़ी बंदियों के साथ दुर्व्यवहार की तस्वीरें सामने आने के बाद बुश प्रशासन की काफ़ी आलोचना हुई है
मानवाधिकार संगठन 'ह्यूमन राइट्स वॉच' का कहना कि इराक़ी बंदियों के साथ जो दुर्व्यवहार हुआ है वह अंतरराष्ट्रीय क़ानून को दरकिनार करने के फ़ैसले की वजह से हुआ है.

संगठन के अनुसार बग़दाद की अबू ग़रेब जेल की जो भयावह तस्वीरें सामने आईं वह जिनेवा संधि को नज़रअंदाज़ करने की नीति का सीधा परिणाम है.

उधर बुश प्रशासन का कहना है कि दुर्व्यवहार सुनियोजित तरीक़े से नहीं हुआ बल्कि कुछ सैनिकों ने अपने स्तर पर गड़बड़ियाँ कीं.

संगठन ने सरकार को चुनौती दी है कि वह संबंधित सरकारी दस्तावेज़ जारी करके अपनी बात सिद्ध करे.

'ह्यूमन राइट्स वॉच' ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, "अबू ग़रेब में जो कुछ हुआ वह नियमों को दरकिनार करने का बुश प्रशासन का फ़ैसला था."

संगठन के एक वकील रीड ब्रॉडी का कहना था, "मानसिकता ये थी कि सब चलता है."

 अबू ग़रेब में जो कुछ हुआ वह नियमों को दरकिनार करने का बुश प्रशासन का फ़ैसला था
ह्यूमन राइट्स वॉच रिपोर्ट

संगठन का कहना है कि ये दुर्व्यवहार इसलिए हुए क्योंकि बुश प्रशासन ने 11 सितंबर के हमलों के बाद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय नियमों को नज़रअंदाज़ करने का फ़ैसला किया.

'ह्यूमन राइट्स वॉच' के अनुसार इसकी वजह से अमरीका ने ग्वांतानामो बे जैसी जेल बनाईं और वह बंदियों को ऐसी जगहों पर भेज रहा है जहाँ उन्हें पीटकर उनसे जानकारी उगलवाई जा रही है.

रिपोर्ट का कहना है कि अमरीका ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार नियमों को भी ताक पर रख दिया है और बंदियों के साथ काफ़ी दुर्व्यवहार हो रहा है.

इसके तहत बंदियों को ज़रूरी नींद नहीं लेने दी जा रही है, उन्हें नक़ाब पहनाया जा रहा है और नंगे रखा जा रहा है.

रिपोर्ट का कहना है कि पिछले दो साल से अमरीका सरकार ऐसे सभी आरोपों को दबाने में लगी है और जब तक अबू ग़रेब जेल की तस्वीरें नहीं आईं बंदियों को प्रताड़ित किया ही जा रहा था.

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