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अदालत ने कहा, इसराइली दीवार अवैध | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने पश्चिमी तट में बन रही इसराइल की 'सुरक्षा दीवार' को अवैध करार दिया है. अदालत का कहना है कि ये दीवार अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करती है और इसे इसराइल की सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए भी जायज़ नहीं ठहराया जा सकता. चीन के जज का कहना था कि ऐसी दीवार का निर्माण अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन है. फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात ने अदालत के इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि ये फ़लस्तीनियों और दुनिया भर के स्वतंत्र लोगों की जीत है. इसराइल का कहना है कि वह हेग की अदालत का इस बारे में आ रहा फ़ैसला नहीं मानेगा. उसका कहना है कि वह इस दीवार का निर्माण बम हमलावरों को दूर रखने के लिए हो रहा है. अदालत ने फ़ैसला सुनाते हुए सबसे पहले इसराइल के इसी दावे को ख़ारिज किया कि उसके पास इस मसले पर फ़ैसला करने का कोई अधिकार नहीं है. अदालत के अनुसार इस तरह की दीवार बाद में स्थाई होकर इसराइल और फ़लस्तीन के बीच सीमा बन सकती है. अदालत ने फ़लस्तीनी इलाक़ों में इसराइली बस्तियों को भी अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया. फ़लस्तीनियों ने इस फ़ैसले को ऐतिहासिक बताया है और कहा है कि वे इसराइल के विरुद्ध प्रतिबंध लगाने की माँग करेंगे. उधर अमरीका का कहना है कि राजनीतिक मसले सुलझाने के लिए अदालत उपयुक्त मंच नहीं है. |
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