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शेरॉन ने इस्तीफ़ा देने से इनकार किया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अपने राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा संकट झेल रहे इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने कहा है कि ग़ज़ा योजना अस्वीकृत हो जाने के बावजूद वे अपने पद से त्यागपत्र नहीं देंगे. इसराइली सैनिकों और यहूदी बस्तियों को ग़ज़ा से हटाने की शेरॉन की योजना पर रविवार को सत्ताधारी लिकुड पार्टी सदस्यों ने मतदान किया था. एग्ज़िट पोल से संकेत मिला है कि सत्ताधारी पार्टी के 60 प्रतिशत सदस्यों ने इसे नामंज़ूर कर दिया है. अपने राजनीतिक जीवन में इस योजना को ख़ासा महत्वपूर्ण बताने वाले प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने दुख के साथ मतदान के नतीजों को स्वीकार किया है. हालाँकि अमरीका ने शेरॉन की योजना पर अपना समर्थन दोहराते हुए कहा है कि यह योजना मध्यपूर्व में शांति की दिशा में उठाया गया क़दम है. संकट यरुशलम से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि मतदान के नतीजों से इसराइल की राजनीति में संकट आ गया है.
उनका कहना है कि अब शेरॉन को पार्टी और देश की बागडोर संभाले रखने के लिए अपना राजनीतिक अनुभव दिखाना होगा. प्रधानमंत्री शेरॉन की ग़ज़ा योजना में इसराइली सैनिकों और क़रीब साढ़े सात हज़ार यहूदी बस्तियों को हटाने का प्रस्ताव है. जिसे अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश का भी समर्थन है. हालाँकि इसराइली जनता का एक बड़ा तबका शेरॉन की इस योजना का समर्थन करता है लेकिन पार्टी में ही उनके ख़िलाफ़ महौल खड़ा हो गया है. फ़लस्तीनी भी शेरॉन की इस योजना से नाराज़ है लेकिन कारण दूसरे हैं. फ़लस्तीनियों का कहना है कि इस योजना के बारे में उनसे कोई बातचीत नहीं की गई और पश्चिमी तट और पूर्वी यरूशलम की यहूदी बस्तियों के बारे में कुछ नहीं कहा गया है. |
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