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सुरक्षा दीवार का रास्ता बदलने का आदेश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइल के हाई कोर्ट ने सरकार को पश्चिमी तट में बन रही सुरक्षा दीवार का रास्ता बदलने का आदेश दिया है. हाई कोर्ट का कहना है कि सुरक्षा दीवार के कारण फ़लस्तीनियों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. इसराइल द्वारा बनाए जा रही इस सुरक्षा दीवार पर पहले से ही विवाद बना हुआ है और फ़लस्तीन इसका कड़ा विरोध करता रहा है. फ़लस्तीन का कहना है कि दीवार उसकी ज़मीन पर बन रही है. हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि येरूशलम के आसपास बन रही सुरक्षा दीवार का रास्ता बदलना ज़रूरी है भले ही इसका मतलब इसराइल के लिए सुरक्षा स्तर में थोड़ी कमी हो. येरूशलम से बीबीसी की बारबारा प्लेट का कहना है कि हाई कोर्ट का यह आदेश सुरक्षा दीवार को लेकर अन्य क़ानूनी विवादों में एक उदाहरण क़ायम कर सकता है. तर्क इसराइल का कहना है कि आत्मघाती हमलावरों से बचने के लिए सुरक्षा दीवार ज़रूरी है.
लेकिन फ़लस्तीन का तर्क यह है कि इससे लोग अपने परिवार से अलग हो रहे हैं, उनकी नौकरियाँ छूट रही हैं और बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी हो रही है. हेग की अंतरराष्ट्रीय अदालत अगले महीने की नौ तारीख़ को इसराइली सुरक्षा दीवार की वैधता पर अपना फ़ैसला सुनाने वाली है. इसराइली हाई कोर्ट के इस फ़ैसले से येरूशलम के पश्चिमोत्तर 30 किलोमीटर के खंड पर प्रभाव पड़ेगा. अदालत में यह मामला ले जाने वाले लोगों का कहना है कि इस दीवार के कारण फ़लस्तीन के 10 गाँवों में रहने वाले 45 हज़ार लोगों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा. इसराइली हाई कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने यह फ़ैसला दिया कि सुरक्षा दीवार के लिए दूसरा रास्ता ढूँढ़ा जा सकता है. |
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