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इसराइल के ख़िलाफ़ निंदा प्रस्ताव पारित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने गज़ा पट्टी में इसराइली सैनिक कार्रवाई में निर्दोष नागरिकों के मारे जाने की घटना के बाद एक निंदा प्रस्ताव पारित किया है. अल्जीरिया की ओर से रखा गया यह प्रस्ताव बिना किसी विरोध के पारित हो गया, सुरक्षा परिषद के पाँच अस्थायी और दस स्थायी सदस्यों में से चौदह देशों ने इस प्रस्ताव के समर्थन में वोट दिया. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आम तौर पर इसराइल का साथ देने वाले अमरीका ने इस बार मतदान से अलग रहने का फ़ैसला किया. सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पारित होने के बाद इसराइल के दूत डान गिलरमैन ने परिषद के प्रति अपनी निराशा का इज़हार किया, उन्होंने कहा कि जब इसराइली मारे जाते हैं तो संयुक्त राष्ट्र कुछ क्यों नहीं करता. इससे पहले अमरीका कई बार सुरक्षा परिषद में इसराइल के ख़िलाफ़ लाए गए निंदा प्रस्तावों पर वीटो लगा चुका है. लेकिन इस बार अमरीका ने कड़ा रुख़ अपनाया है, अमरीकी राष्ट्रपति भवन ने भी इस मामले में एक बयान जारी करके इसराइली सरकार की निंदा की है.
राष्ट्रपति भवन के प्रवक्ता ने कहा, "पिछले कुछ दिनों में ग़ज़ा में इसराइल की सैनिक कार्रवाई से शांति और सुरक्षा की स्थिति में कोई बेहतरी नहीं होगी. " गज़ा पट्टी के शहर रफ़ा में एक प्रदर्शन पर इसराइली सैनिकों की गोलीबारी में 10 फ़लस्तीनी नागरिकों के मारे जाने और अनेक लोगों के घायल होने के बाद इसराइल की बड़े पैमाने पर आलोचना हुई थी. संयुक्त राष्ट्र के इस प्रस्ताव में गज़ा पट्टी में फ़लस्तीनियों के मकान गिराए जाने की इसराइली कार्रवाइयों को रोकने की भी बात कही गई है. कड़ी फटकार इतना ही नहीं, अमरीका के विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने कहा, "ग़ज़ा पट्टी में पिछले दिनों इसराइल की हरकतों से समस्या पैदा हो गई है, हालात बिगड़े हैं. इसकी वजह से हमारे लिए शांति प्रक्रिया को दोबारा शुरू करना और कठिन हो गया है." संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कोफ़ी अन्नान और यूरोपीय संघ ने भी इसराइली कार्रवाई की निंदा की है. फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह फलस्तीनियों को इसराइल से बचाए, उन्होंने रफ़ा की घटना को बर्बर अत्याचार की संज्ञा दी है. मंगलवार से लगातार चल रही कार्रवाई में अब तक तीस से अधिक फ़लस्तीनी अपनी जान गवाँ चुके हैं और संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ रफ़ा में घरों को गिराने के सैनिक अभियान के कारण एक हज़ार से अधिक फ़लस्तीनी बेघर हो गए हैं. इसराइली सेना का कहना है कि घरों को गिराने मक़सद उन सुरंगों को नष्ट करना है जिनके ज़रिए चरमपंथी हथियारों को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाते हैं. सफ़ाई इसराइल का कहना है कि उसे रफ़ा में हो रहे प्रदर्शन पर हेलिकॉप्टरों से गोलियाँ चलानी पड़ीं क्योंकि प्रदर्शनकारियों में कई बंदूकधारी थे जो इसराइली सेना के लिए ख़तरा थे. इसराइल की सेना ने बाद में इस घटना में आम नागरिकों के मारे जाने पर अफ़सोस का इज़हार किया है, सेना के प्रवक्ता ने कहा, "हमें अफ़सोस है कि नागरिक हमले के शिकार हुए, हम फ़लस्तीनी नागरिकों को निशाना नहीं बनाते." संयुक्त राष्ट्र में इसराइली दूत डान गिलरमैन ने कहा, "पूरी ग़ज़ा पट्टी, ख़ास तौर पर रफ़ा इसराइली शहरों की ओर निशाना साधने वाली मिसाइलों का अड्डा बन गया था, अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसराइल से क्या चाहता है, क्या हम चुप बैठे रहें और ख़तरे को वास्तविकता में बदलने दें?" अमरीका ने इसराइल के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित होने देकर शेरॉन सरकार को संकेत दिया है कि बुश प्रशासन इस तरह के मामलों में उनका साथ नहीं देगा. लेकिन साथ ही, अमरीका ने प्रस्ताव का समर्थन भी नहीं किया, उसका कहना था कि निंदा प्रस्ताव आतंकवाद के सवाल पर चुप है जो ग़लत है. |
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