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इसराइली सुरक्षा दीवार पर अलग राय | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीनी नेता अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत के उस फ़ैसले का स्वागत कर रहे हैं जिसमें अदालत ने पश्चिमी तट में बन रही इसराइल की 'सुरक्षा दीवार' को अवैध करार दिया है. लेकिन इसराइल ने इस निर्णय को अन्याय बताते हुए कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फ़ैसले को स्वीकार नहीं करेगा जो बाध्यकारी भी नहीं है. शुक्रवार को सुनाए गए अपने फ़ैसले में अदालत ने कहा था कि ये दीवार अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करती है और इसे इसराइल की सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए भी जायज़ नहीं ठहराया जा सकता. इसराइल इस निर्माण को उचित ठहराता है और तर्क देता है कि पश्चिमी तट के चरमपंथियों को रोकने के लिए इसका निर्माण ज़रुरी है लेकिन फ़लस्तीनी नेता इसे ज़मीन हथियाने का षडयंत्र बताते हैं. उधर अमरीका और ब्रिटेन सहित कई देशों ने अंतरराष्ट्रीय अदालत से कहा है कि वह इस मामले से अलग रहे क्योंकि इससे मध्यपूर्व की शांति योजना में बाधा आएगी. व्हाइट हाउस के प्रवक्ता स्कॉट मैक्क्लेलन ने कहा, "हम नहीं समझते कि किसी राजनीतिक समस्या को हल करने के लिए वह कोई उचित मंच है." अंतरराष्ट्रीय अदालत का फ़ैसला संयुक्त राष्ट्र को कोई निर्णय लेने के लिए आधार प्रदान कर सकता है. फ़ैसला चीन के जज का कहना था कि ऐसी दीवार का निर्माण अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन है. अदालत के अनुसार इस तरह की दीवार बाद में स्थाई होकर फ़लस्तीनियों के अलग राष्ट्र बनने की स्थिति में, दोनों देशों के बीच सीमा बन सकती है. अदालत ने फ़लस्तीनी इलाक़ों में इसराइली बस्तियों को भी अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया. फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात ने अदालत के इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि ये फ़लस्तीनियों और दुनिया भर के स्वतंत्र लोगों की जीत है. |
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