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बुधवार, 09 जून, 2004 को 04:09 GMT तक के समाचार
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इराक़ संप्रभुता प्रस्ताव की मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद
लंबी खींचतान के बाद परिषद में सहमति बनी
30 जून को सत्ता हस्तांतरण के बाद इराक़ के भविष्य के बारे में सुरक्षा परिषद में पेश किया गया अमरीकी प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हो गया है.

इसी प्रस्ताव के ज़रिए सत्ता हस्तांतरण होगा और सरकार के अधिकार परिभाषित होंगे.

प्रस्ताव की मुख्य बातें इस तरह हैं--

सत्ता हस्तांतरण

  • 30 जून 2004 को सत्ता हस्तांतरण के साथ ही अमरीकी नेतृत्व वाले गठबंधन का शासन समाप्त हो जाएगा और सत्ता इराक़ियों के हाथों में आ जाएगी.
  • प्रस्ताव के मुताबिक़ सत्ता हस्तांतरण के साथ ही विदेशी क़ब्ज़ा समाप्त हो जाएगा और इराक़ी संप्रभुता बहाल हो जाएगी.
  • इराक़ी लोग अपना राजनीतिक भविष्य तय करने के लिए आज़ाद होंगे और उन्हें अपने वित्तीय मामलों और देश के संसाधनों पर भी पूरा नियंत्रण और अधिकार होगा.

चुनाव समय सारिणी

  • जुलाई 2004 में एक ऐसा सम्मेलन बुलाया जाएगा जिसमें इराक़ी विविधता का प्रतिनिधित्व करने वाले लोग भाग लेंगे और जो 100 सदस्यों वाली एक ऐसी परामर्श परिषद का गठन करेंगे. यह परिषद सरकार को सलाह देने का काम करेगी.
  • एक अस्थाई राष्ट्रीय एसेंबली के गठन के लिए संभवतः 31 दिसंबर 2004 तक चुनाव कराना. लेकिन देरी हो तो 31 मार्च 2005 तक हर हाल में चुनाव होने चाहिए.
  • उस अस्थाई लेकिन चुनी हुई राष्ट्रीय सरकार पर देश का स्थाई संविधान बनाने की ज़िम्मेदारी होगी और उसी संविधान के आधार पर 31 दिसंबर 2005 तक एक निर्वाचित सरकार का गठन होगा.

संयुक्त राष्ट्र की भूमिका

  • संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधि और इराक़ी मिशन जुलाई 2004 में एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कराने में मदद करेगा.
  • चुनाव कराने के मामलों इराक़ी सरकार को सलाह देना और मदद करना.
  • राष्ट्रीय संविधान तैयार करने में सर्वसम्मति बनाने और मसौदा तैयार करने में मदद करना.

सुरक्षा और बहुराष्ट्रीय सेना

सुरक्षा परिषद:

  • एक इराक़ी सुरक्षा सेना तैयार करने के अंतरिम सरकार के प्रयासों का स्वागत करती है जो आख़िरकार देश की सुरक्षा और स्थिरता की ज़िम्मेदारी संभालेगी.
  • मानती है कि इराक़ में एक बहुराष्ट्रीय सेना अंतरिम सरकार के अनुरोध पर ही मौजूद रहेगी और इस बारे में प्रस्ताव का हिस्सा बने वो पत्र रहेंगे जो अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल और इराक़ी प्रधानमंत्री ईयाद अलावी ने लिखे हैं.
  • निर्णय करती है कि बहुराष्ट्रीय सेना को वो सब क़दम उठाने का अधिकार होगा जो इराक़ की सुरक्षा और स्थिरता के लिए ज़रूरी होंगे और उन कार्रवाइयों का आधार इस प्रस्ताव का हिस्सा बने पत्र होंगे.
  • उन पत्रों को प्रस्ताव का हिस्सा बनाए जाने का स्वागत करती है और इराक़ी सरकार और बहुराष्ट्रीय सेना के बीच संबंधों क बारे में प्रबंध किए जा रहे हैं.
  • निर्णय करती है कि बहुराष्ट्रीय सेना के इराक़ में ठहरने के बारे में इराक़ी सरकार के अनुरोध पर या इस प्रस्ताव की तारीख़ से एक साल के बाद समीक्षा करेगी. ऐसा नहीं होता है तो प्रस्ताव में प्रस्तावित राजनीतिक प्रक्रिया पूरी होने पर यह प्रावधान समाप्त हो जाएगा.
  • एकीकृत कमांड के अधीन एक बहुराष्ट्रीय सेना गठित करने के इरादे को भी समझती है और यह सेना इराक़ में संयुक्त राष्ट्र के मिशन को सुरक्षा मुहैया कराएगी.

तेल संपदा

  • गठबंधन प्रशासन की समाप्ति के बाद विकास निधि का धन इराक़ी सरकार के निर्देश और आदेश पर ही ख़र्च होगा. इस निधि में तेल से होने वाली आमदनी रखी जाती है और इस पर अभी तक गठबंधन प्रशासन का अधिकार है.
  • अंतरराष्ट्रीय सलाह और निगरानी बोर्ड इन निधि से होने वाले ख़र्च पर नज़र रखेगा. इस बोर्ड में इराक़ सरकार का नियुक्त किया हुआ एक सदस्य शामिल किया जाएगा जिसे मतदान का अधिकार होगा.
  • सुरक्षा परिषद फ़ैसला करती है कि इन प्रावधानों पर इराक़ी सरकार के अनुरोध पर या प्रस्ताव की तारीख़ से 12 महीने बाद फिर से विचार करे. अन्यथा ये प्रावधान इराक़ में राजनीतिक प्रक्रिया पूरी होने के साथ स्वतः ही समाप्त हो जाएंगे.
  • खाद्य सामग्री ख़रीदने के लिए तेल की बिक्री से संबंधित वे तमाम अधिकार और ज़िम्मेदारियाँ इराक़ि सरकार के पास आ जाएंगी जो गठबंधन प्रशासन को स्थानांतरित की गई थीं.
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