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'सरकार गिराने की साज़िश है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सऊदी अरब के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि आतंकवादी देश के तेल उद्योग को निशाना बना रहे हैं जिससे सऊदी सरकार गिराई जा सके. सऊदी अरब के शाहज़ादा अब्दुल्ला को विदेशी मामलों में सलाह देने वाले आदिल अल-जुबैर ने वॉशिंगटन में ये आशंका ज़ाहिर की है. मगर अल-जुबैर ने ज़ोर देकर ये भी कहा कि ये साज़िश सफल नहीं होगी. सऊदी सरकार की ओर से ये अब तक का सबसे स्पष्ट बयान है जिससे पता चलता है कि वे आतंकवादी हमले के ख़तरे को किस तरह देख रहे हैं. सरकार में प्रमुख स्थान रखने वाले अल-जुबैर ने कहा कि आतंकवादियों का उद्देश्य सऊदी सरकार को गिराना है. उनका कहना था कि इन हमलों का मक़सद देश के तेल उद्योग में काम कर रहे विदेशी कर्मचारियों को भयभीत करना है जिससे वे देश छोड़कर चले जाएँ.
अल-जुबैर के अनुसार इसका नतीजा ये होगा कि मुख्य रूप से तेल उद्योग के सहारे चलने वाले देश सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह नुक़सान पहुँचेगा. उनके अनुसार इसके बाद सरकार को आसानी से हटाया जा सकेगा. मगर अल-जुबैर के अनुसार ये साज़िश क़ामयाब नहीं होगी क्योंकि देश के तेल उद्योग पूरी तरह सुरक्षित हैं और तेल उद्योग में मुख्य रूप से सऊदी नागरिक ही काम करते हैं न कि विदेशी. सऊदी अरब ने दान दे रहे विभिन्न संगठनों के ज़रिए आतंकवादी संगठनों तक पहुँच रहे धन को रोकने के लिए विभिन्न क़दमों की घोषणा की है. इनके तहत अब देश के बाहर जिसे भी दान देना होगा उसे एक केंद्रीय कोष के ज़रिए ही ये धन भेजना होगा. इस तरह उस धन पर अब बेहतर तरीक़े से निगरानी रखी जा सकेगी. |
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