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सऊदी अरब में बंधक संकट जारी, सुरक्षाकर्मी तैनात | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सऊदी अरब के खोबर शहर में सुरक्षाकर्मियों ने एक तेल कंपनी के उस रिहायशी परिसर को घेर लिया है जहाँ चरमपंथियों ने कम से कम 10 विदेशियों को बंधक बना रखा है. वहाँ गोलीबारी की आवाज़ें सुनाई पड़ रही हैं. इससे पहले सऊदी अरब के इस पूर्वी शहर ख़ोबर में इन बंदूकधारियों ने कम-से-कम 10 लोगों की हत्या कर दी थी. पहले मरनेवालों और बंधकों की संख्या और अधिक बताई जा रही थी. बाद में सऊदी अरब के शहज़ादे ने कहा कि तीन अलग जगहों पर हुए हमले में 10 लोग मारे गए जिनमें कुछ विदेशी भी हैं. हमले बंदूकधारियों ने तीन अलग-अलग जगहों पर अंधाधुंध गोलियाँ चलाईं जिसमें कम-से-कम 10 लोग मारे गए. मरने वालों में पश्चिमी देशों के तीन नागरिक और मिस्र का एक 10 साल का लड़का भी है. ये तीनों हमले तेल से जुड़े ठिकानों पर हुए. मई में ऐसी तेल कंपनी के किसी ठिकाने पर हुआ यह दूसरा हमला है जिससे पश्चिमी देशों का ताल्लुक़ है. बंधक प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हमला करने के बाद चार बंदूकधारी, सैनिकों की वर्दी पहने आए और एक परिसर में जाकर गोलियाँ चलाने लगे. ये एक पेट्रोलियम कंपनी का परिसर था और यहाँ ज़्यादातर कई विदेशी कर्मचारी भी थे. इसके बाद उन्होंने उस परिसर पर कब्जा कर लिया. सऊदी अरब में लेबनान के राजदूत अहमद शमात ने कहा कि उन बंधकों में से लेबनान के पाँचों नागरिकों को रिहा कर दिया गया है. उन्होंने ये नहीं बताया कि किसी और देश के नागरिक भी बंधक बनाए गए हैं या नहीं. चरमपंथी संकट ख़ोबर सऊदी अरब की राजधानी रियाद से लगभग 400 किलोमीटर पूर्वोत्तर में है. देश में ख़ासतौर पर 2003 में हुए बम विस्फोट के बाद से आतंकवादियों के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा है. सरकार का कहना है कि उसने इस अभियान के दौरान कई हमले टाले हैं. इससे पहले एक मई को भी यांबू में हमले हुए थे जिसमें छह विदेशी और एक सऊदी नागरिक मारा गया था. |
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