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ब्लेयर ने बुश के साथ सहमति जताई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा है कि वह अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की इस बात से सहमत हैं कि इराक़ में अमरीकी गठबंधन वाली सेनाएं अमरीकी नियंत्रण में ही रहनी चाहिए. ग़ौरतलब है कि इराक़ में 30 जून को सत्ता हस्तांतरण के बाद नई अंतरिम सरकार का गठन प्रस्तावित है और यह एक बड़ा मुद्दा बन गया है कि विदेशी सेनाओं पर सरकार का नियंत्रण हो या नहीं. अमरीका ने कहा है कि इराक़ में 30 जून को सत्ता हस्तांतरण के बाद भी अमरीका के नेतृत्व वाली विदेशी सेनाओं पर अमरीका का ही नियंत्रण रहेगा. टोनी ब्लेयर ने मंगलवार को कहा था कि इराक़ में विदेशी सेनाओं की गतिविधियों पर वहाँ की सरकार का नियंत्रण होगा और सरकार को वीटो का भी अधिकार होगा. उन्होंने कहा था कि फलूजा जैसी कार्रवाई करने के लिए विदेशी सेनाओं को सरकार की इजाज़त लेनी होगी. अब बुधवार को टोनी ब्लेयर ने ब्रितानी संसद में कहा कि इराक़ में विदेशी सेनाएं अपने अभियानों की ख़ुद ज़िम्मेदार होंगी. ब्लेयर का यह ताज़ा बयान उनके उस बयान से बिल्कुल अलग है कि विदेशी सेनाओं को इराक़ सरकार की अनुमति लेनी होगी. विदेशी सेनाओं की भूमिका और उन पर नियंत्रण का मुद्दा ही संयुक्त राष्ट्र में पेश किए गए प्रस्ताव में छाया हुआ है और अमरीका और ब्रिटेन इस पर समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं. प्रधानमंत्री इस बीच अमरीका ने संकेत दिया है कि इराक़ में 30 जून को सत्ता हस्तांतरण के बाद गठित होने वाली अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री हुसैन शहरिस्तानी हो सकते हैं. हुसैन शहरिस्तानी एक परमाणु वैज्ञानिक हैं और वह सद्दाम हुसैन के शासन काल में अबू ग़रेब जेल में रह चुके हैं. अमरीकी विदेश विभाग ने कहा है कि हुसैन शहरिस्तानी प्रधानमंत्री पद के लिए बहुत उपयुक्त हैं. इराक़ में संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत लख़दर ब्राहिमी नई अंतरिम सरकार के सदस्यों को चुन रहे हैं और इसमें वह इराक़ के लिए राष्ट्रपति बुश के विशेष सलाहकार रॉबर्ट ब्लैकविल से सलाह ले रहे हैं. |
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