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इराक़ के बारे में प्रस्ताव पर चर्चा जारी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में सत्ता हस्तांतरण और उसके बाद संप्रभुता और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अमरीका और ब्रिटेन ने सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव का मसौदा पेश किया है. सोमवार को सुरक्षा परिषद में इस पर चर्चा हुई जो बुधवार को भी जारी रहेगी. प्रस्ताव में स्पष्ट तौर पर इराक़ में एक संप्रभु अंतरिम सरकार के गठन की बात कही गई है. प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि इराक़ में अमरीका के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना अभी वहाँ मौजूद रहेगी. लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इराक़ की नई अंतरिम सरकार और गठबंधन सेना के बीच कैसे समन्यव होगा. हालाँकि इराक़ी संप्रभुता के बारे में सुरक्षा परिषद के सभी 15 सदस्यों के बीच अनौपचारिक बैठकें तो होती रही है लेकिन यह पहला मौक़ा है कि अमरीका और ब्रिटेन अपने विचार और योजनाएं एक प्रस्ताव के रूप में सुरक्षा परिषद के सामने रख रहे हैं. इस प्रस्ताव में मुख्य मुद्दे-- इराक़ की अंतरिम सरकार को कितने अधिकार मिलेंगे. इराक़ में मौजूद अनेक देशों की सेनाओं को क्या दर्जा हासिल होगा और वे कितने समय तक वहाँ मौजूद रहेंगी. फिलहाल इस सेना का नेतृत्व अमरीका कर रहा है. गठबंधन के लिए लड़ने वाली सेनाओं को मुक़दमों वग़ैरा से नई सरकार से कितनी छूट मिलेगी. संयुक्त राष्ट्र की क्या भूमिका होगी. इराक़ के तेल ख़ज़ाने पर किसका अधिकार होगा. जिन पर फिलहाल अमरीका और ब्रिटेन का अधिकार है. बीबीसी संवाददाता सुज़ाना प्राइस का कहना है कि इन सबमें विवादास्पद मुद्दा होगा सुरक्षा और यह कि सत्ता हस्तांतरण के बाद गठबंधन की सेनाओं और इराक़ी सुरक्षा बलों पर किसका नियंत्रण होगा. अमरीका का कहना है कि सर्वोच्च नियंत्रण अमरीका का ही रहना चाहिए जबकि अन्य देश इससे सहमत नहीं हैं. जर्मनी ने सुझाव दिया है कि एक राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद बनाई जाए जो सभी सेनाओं के बीच तालमेल के लिए ज़िम्मेदार हो और इसमें अमरीकी और इराक़ी लोग शामिल हों. |
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