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शुक्रवार, 21 मई, 2004 को 03:14 GMT तक के समाचार
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छापे पर चलाबी की तीखी प्रतिक्रिया
अहमद चलाबी
चलाबी ने छापे को बदनाम करने की साज़िश बताया
इराक़ में अमरीका के करीबी सहयोगी रहे अहमद चलाबी ने बग़दाद में अपने घर और दफ़्तरों पर छापे मारे जाने की घटना के बाद अमरीका की कड़ी आलोचना की है.

बग़दाद में अमरीकी सैनिकों ने अहमद चलाबी के घर को चारों ओर से घेरकर तलाशी ली, सैनिक उनके कंप्यूटर और दस्तावेज़ों को उठाकर ले गए.

इराक़ की शासकीय परिषद के एक प्रमुख सदस्य चलाबी ने कहा है कि यह उन्हें बदनाम करने की कोशिश थी.

अहमद चलाबी ने खुलकर सवाल उठाए थे कि अमरीका किस हद तक इराक़ियों को सत्ता सौंपने को तैयार है, इसके बाद अमरीकी प्रशासन और चलाबी के बीच दूरी बढ़ती गई.

उन्होंने कहा, "मैं इराक़ में अमरीका का सबसे बड़ा दोस्त हूँ, अगर अमरीकी प्रशासन ने मेरे घर पर हथियारबंद हमला करने का फ़ैसला किया तो आप समझ सकते हैं कि अमरीकी प्रशासन और इराक़ी जनता के रिश्ते कितने ख़राब हो चुके हैं."

 आप समझ सकते हैं कि अमरीकी प्रशासन और इराक़ी जनता के रिश्ते कितने ख़राब हो चुके हैं
अहमद चलाबी

टूटे काँच वाला एक फोटो फ्रेम दिखाते हुए अहमद चलाबी ने बताया कि किस तरह उन्हें बिस्तर से उठाया गया, दफ़्तर में तोड़फोड़ की गई और उनकी चीज़ों को तहस-नहस किया गया.

अमरीकी प्रशासन ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि चलाबी के किस चीज़ की तलाश हो रही थी और उन्हें वहाँ से क्या मिला.

अमरीकी रक्षा मंत्री डॉनल्ड रम्सफ़ेल्ड ने कहा है कि उन्हें इस छापे के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और यह क़दम इराक़ी अधिकारियों ने उठाया था.

लेकिन बीबीसी के साथ बातचीत में चलाबी का कहना है कि अमरीकी प्रशासन की मंज़ूरी के बिना ऐसी कार्रवाई हो ही नहीं सकती, चलाबी मानते हैं कि अमरीकी उनके प्रभाव को लेकर ख़तरा महसूस कर रहे थे.

बदले रिश्ते

पिछले वर्ष अहमद चलाबी उन चंद लोगों में से थे जो अमरीकी हमले के कुछ ही समय बाद इराक़ लाए गए थे और उन्हें इराक़ के भावी राष्ट्रपति के रूप में भी देखा जा रहा था.

सैनिक
चलाबी के घर और दफ्तर पर मारे गए छापे

वे अमरीकी रक्षा मंत्रालय के करीबी माने जाते रहे लेकिन धीरे-धीरे उनके रिश्ते बिगड़ते गए, चलाबी इराक़ के मामलों में अमरीका के तौर-तरीक़ों की खुलकर आलोचना कर चुके हैं.

माना जाता है कि इराक़ पर हमले से पहले उनकी पार्टी इराक़ी नेशनल कांग्रेस ने अमरीकी प्रशासन को कुछ ख़ुफ़िया जानकारियाँ दी थीं जिनका इस्तेमाल अमरीका ने लड़ाई को जायज़ ठहराने के लिए किया था.

अब कई अमरीकी अधिकारी सवाल उठा रहे हैं कि क्या अहमद चलाबी और उनकी पार्टी के लोगों ने अमरीका को ग़लत जानकारियाँ दी थीं.

कुछ लोग मान रहे हैं कि ये छापे उन्हीं जानकारियों की तलाश में या फिर नई जानकारियों की खोज में मारे गए थे.

लेकिन अहमद चलाबी इस बात से इनकार करते हैं कि अमरीका अब उन पर विश्वास नहीं करता है, वे कहते हैं कि महाविनाश के हथियारों के मामले में अमरीका को गुमराह किया गया.

इतना ही नहीं, इससे पहले अमरीका ने उनकी पार्टी को दी जाने वाली आर्थिक सहायता में भी भारी कटौती की है.

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