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मंगलवार, 25 मई, 2004 को 13:07 GMT तक के समाचार
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"इराक़ सरकार को अंतिम अधिकार होगा"
इराक़ में विदेशी सैनिक
सैनिकों पर नियंत्रण ही मुख्य मुद्दा है
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा है कि इराक़ में 30 जून को सत्ता हस्तांतरण के बाद विदेशी सेनाओं की गतिविधियों पर अंतरिम सरकार का ही नियंत्रण होगा.

उधर फ्रांस और जर्मनी ने इराक़ में सत्ता हस्तांतरण और उसके बाद संप्रभुता और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अमरीका और ब्रिटेन के प्रस्ताव में संशोधन की मांग की है.

रूस ने कहा है कि यह प्रस्ताव बहुत से सवालों के जवाब नहीं दे पाता है.

जापान ने भी प्रस्ताव का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इसे पारित कर लिया जाएगा.

अमरीका की नियुक्त की हुई इराक़ी अंतरिश शासकीय परिषद ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है जबकि परिषद के मुखिया ग़ाज़ी मशाल आजिल अल यावर ने कहा है कि यह प्रस्ताव परिषद की उम्मीदों के मुताबिक़ नहीं है.

उन्होंने उम्मीद जताई है कि प्रस्ताव को अंतिम रूप देते समय परिषद के विचारों को भी शामिल किया जाएगा.

फ्रांस के विदेश मंत्री माइकल बार्नियर ने कहा है कि सत्ता हस्तांतरण की योजना भरोसेमंद, वास्तविक और ईमानदार होनी चाहिए.

ग़ौरतलब है कि फ्रांस सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य है और उसे वीटो का अधिकार प्राप्त है. फ्रांस ने इराक़ पर हमले का विरोध भी किया था.

विश्लेषकों का कहना है कि प्रस्ताव पर बहस का मुद्दा यही रहेगा कि इराक़ में नई सरकार को वहाँ तैनात विदेशी सैनिकों पर किस हद तक नियंत्रण होगा.

सोमवार को सुरक्षा परिषद में इस पर चर्चा शुरू हुई जो बुधवार को भी जारी रहेगी.

प्रस्ताव में स्पष्ट तौर पर इराक़ में एक संप्रभु अंतरिम सरकार के गठन की बात कही गई है इराक़ में अमरीका के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना वहाँ मौजूद रहेगी और उस पर सरकार का सीमित नियंत्रण होगा.

अंतिम नियंत्रण

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा है कि तीस जून को सत्ता मिलने के बाद इराक़ी सरकार को विदेशी सेनाओं की गतिविधियों के बारे में अंतिम अधिकार हासिल होंगे.

ब्लेयर ने मंगलवार को लंदन में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि तीस जून के बाद विदेशी सेनाओं को फलूजा जैसी किसी भी कार्रवाई के लिए अंतरिम सरकार की इजाज़त लेनी होगी.

लेकिन फ्रांस ने कहा कि प्रस्ताव में संप्रभुता के मुद्दे पर विस्तार से विचार विमर्श हो और इसमें सुधार किया जाए.

दूसरी तरफ़ अमरीका के सहयोगी देश ऑस्ट्रेलिया ने प्रस्ताव का स्वागत किया है.

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री जॉन हॉवर्ड ने कहा है कि उनकी सेनाएं इराक़ में बनी रहेंगी.

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