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गुरुवार, 06 मई, 2004 को 03:55 GMT तक के समाचार
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बुश आलोचना से नहीं बच सके हैं
राष्ट्रपति बुश
जेल में हुए व्यवहार की जाँच और दोषियों को दंडित करने का वादा किया बुश ने
इराक़ में क़ैदियों के साथ अमरीकी सैनिकों ने कथित रूप से जो अमानवीय बर्ताव किया उस पर सफ़ाई देने के बावजूद राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की आलोचना थमी नहीं है.

राष्ट्रपति बुश ने अमरीकी सहायता से चलने वाले एक अरबी टेलीविज़न पर बुधवार को कहा था कि इराक़ी क़ैदियों के साथ इस तरह का बर्ताव वीभत्स और घृणित है जिसकी निंदा की जानी चाहिए लेकिन उन्होंने इसके लिए माफ़ी नहीं माँगी.

राष्ट्रपति पद के चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार और बुश के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी जॉन कैरी ने कहा है कि इस मामले में बुश की प्रतिक्रिया बहुत धीमी और अनुचित रही है.

जॉन कैरी ने माँग की है कि राष्ट्रपति बुश इस मामले की पूरी ज़िम्मेदारी अपने ऊपर लें और अगर ज़रूरी हो तो इसके लिए माफ़ी भी मांगें.

राष्ट्रपति बुश के इस रवैये पर अरब जगत में भी रौष है और अरब देशों का कहना है कि बुश को माफ़ी मांगनी चाहिए थी.

रोष

अमरीका के एक सहयोगी अरब देश मिस्र सरकार के नियंत्रण वाले समाचार माध्यमों ने पिछले साल इराक़ पर हमला करते समय आज़ादी का नारा लगाने वाले अमरीकी वादों और अब इराक़ी क़ैदियों के साथ हुए बर्ताव की खिल्ली उड़ाई.

जॉर्ज बुश
अरब देशों में ख़ासी नाराज़गी है

मिस्र की राजधानी काहिरा में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि उन्होंने जिन भी लोगों से बात की है उन्होंने यही कहा है कि राष्ट्रपति इस मामले में गंभीर नज़र नहीं आए और न ही उन्होंने ऐसी घटनाओं पर समुचित ग़ुस्सा जताया.

फ्रांस ने भी क़ैदियों के साथ इस तरह के बर्ताव को अस्वीकार्य बताते हुए कहा है कि यह सरासर अंतरराष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन है.

रूस ने भी इस मामले पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि संयुक्त राष्ट्र को ऐसी घटनाओं की जाँच-पड़ताल करनी चाहिए.

उधर वाशिंगटन में जानकारों का कहना है कि राष्ट्रपति बुश रक्षा मंत्री डोनाल्ड रम्सफ़ेल्ड से ख़ासतौर से इसलिए नाराज़ हैं कि उन्होंने इस बारे में सही वक़्त पर और पूरी जानकारी नहीं दी.

रम्सफ़ेल्ड की यह कहते हुए कड़ी आलोचना की जा रही है कि उन्हें अबू ग़रेब जेल में क़ैदियों के मानवाधिकारों के व्यापक हनन की रिपोर्ट मिली थी लेकिन उन्होंने समय रहते इस बारे में ठोस कार्रवाई नहीं की.

अब उन्हें सोमवार को सीनेट की सशस्त्र सेवाओं की समिति के सामने तलब किया गया है.

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