ट्रंप ने अमरीकियों को कैसे 'डराया'?

डोनाल्ड ट्रंप

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    • Author, जेसिका लुस्सेनहॉप
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ मैगज़ीन

अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप कहते आ रहे हैं कि अमरीका ‘संकट के दौर’ से गुजर रहा है और सिर्फ़ उनके पास ही इसका इलाज है.

अपने भाषणों में अरबपति ट्रंप लोगों को अमरीका की 'कमज़ोर हालत' के बारे में बताते हैं.

ट्रंप कहते हैं, "हमारी पुलिस पर हमला और हमारे शहरों में आतंकवाद, हमारी ज़िंदगी के लिए ख़तरा है. 20 जनवरी 2017 से सुरक्षा फिर से दुरुस्त हो जाएगी."

उनके भाषणों का लब्बोलुआब ये है कि आम अमरीकी सुरक्षित नहीं है. इसके पक्ष में वो अप्रवासियों की बढ़ती संख्या, पुलिस की गोलीबारी और मानव हत्याओं के आंकड़े गिनाते हैं.

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हालाँकि ट्रंप ने जो आंकड़े गिनाए थे, कई मीडिया संस्थानों ने उन्हें झुठला दिया है. अमरीका के कई शहरों में कत्ल के मामले बढ़े हैं, लेकिन कुल मिलाकर अपराध का आंकड़ा 1990 के दशक के बाद से निम्नतम स्तर पर है.

आर्थिक मंदी के बाद से बेरोजगारी की दर भी 10 प्रतिशत से घटकर 5.5 प्रतिशत के स्तर पर आ गई है.

लेकिन ट्रंप के सहयोगी न्यूट गिंग्रिच ने कहा है कि आंकड़े अहमियत उतनी अहमियत नहीं रखते, जितनी कि भावनाएं.

पत्नी के साथ डोनाल्ड ट्रंप

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गिंग्रिच ने सीएनएन से कहा, "आम अमरीकी नहीं मानता कि अपराध घटा है, वो नहीं समझते कि वे सुरक्षित हैं. उदारवादियों के पास ऐसे आंकड़ों का अंबार है जो तथ्यों के रूप में सही हो सकते हैं, लेकिन इनका लोगों की भावनाओं से कोई संबंध नहीं है. लोक आतंकित हैं."

साइराकूज यूनिवर्सिटी की एसोसिएट प्रोफ़ेसर शाना गदेरियन कहती हैं कि जब लोग चिंतित होते हैं तो वे ऐसे ही मसलों पर बात करना चाहते हैं. वो कहती हैं, “रिपब्लिकन अप्रवासी, आतंकवाद और अपराध के मुद्दे उठा रहे हैं. यही वजह है कि ट्रंप लोगों के बीच इन्हीं मुद्दों पर बात कर रहे हैं.”

बोस्टन कॉलेज की सहायक प्रोफ़ेसर एमिली थॉरसन कहती हैं, “लोग आसानी से जोखिम का अंदाज़ा नहीं लगा पाते. जैसे कि लोग इबोला से ज़्यादा घबराएंगे जबकि इसके मुक़ाबले शराब उनकी जान ले सकती है.”

बराक ओबामा

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मतदाताओं को अच्छी कहानियां सुनाकर प्रभावित किया जा सकता है. थॉरसन बताती हैं कि किस तरह ट्रंप ने अपराध के आंकड़ों का जिक्र न करते हुए सारा रूट का जिक्र किया, जिसे शराब के नशे में धुत ड्राइवर ने कुचल कर मार डाला था. वो शख्स अमरीका में अवैध तरीके से रह रहा था.

थॉरसन कहती हैं, "वो कहानियां सुना रहे हैं, कुछ ख़ास कहानियां और उम्मीद कर रहे हैं कि लोग तथ्यों के आकलन के लिए इनका इस्तेमाल करेंगे."

डार्टमाउथ कॉलेज के प्रोफेसर ब्रेंडन नेहान कहते हैं कि ये उम्मीद करना कि आम मतदाता के पास अपराधों का पूरा लेखा-जोखा होगा, गलत होगा.

ओबामा और हिलेरी क्लिंटन

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वो कहते हैं, "मुझे उन लोगों से हमदर्दी है जिन्हें तथ्यों की जानकारी नहीं है. मैं मानता हूँ कि मीडिया और राजनेता उन्हें नीचा दिखा रहे हैं. मैं उम्मीद नहीं करता कि लोग अपराध के ताज़ा आंकड़ों की जानकारी रखें."

लेकिन क्या डराने से ही वोटर आपके पक्ष में हो जाएंगे? कम से कम विशेषज्ञ तो ऐसा नहीं मानते. गदेरियन कहती हैं, "लोगों का यकीन हासिल करने के लिए आपको उन्हें कुछ समाधान सुझाने होंगे. अगर आप ऐसा नहीं कर पाते तो लोग कुछ समय बाद इस चिंता से बाहर आना शुरू कर देते हैं."

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