'वो इफ़्तार के लिए कैफे गए थे वापस नहीं लौटे'

ढाका

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बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक कैफे पर शुक्रवार को हुए हमले के बाद स्थानीय लोग अभी तक सन्न हैं और हमले के दौरान देखे मंज़र को याद कर सिहर उठते हैं.

गुलशन इलाक़े में हमले का निशाना बने रेस्तरां के बाजू में रहने वाली रशीला रहीम ने बीबीसी को बताया, ''सुबह आठ बजे ये सब शुरू हुआ. सड़कों पर टैंक नज़र आ रहे थे और चारों ओर से गोलियां चलने की आवाज़ आ रही थी.''

उन्होंने कहा, ''मेरी चाची, उनकी बेटी और दो दोस्त इफ़्तार के लिए कैफे गए थे लेकिन वापस नहीं लौटे.''

एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, ''दो लोग हवा में गोलियां चला रहे थे. मैं चिल्लाकर जान बचाकर भागी. उन्होंने अल्लाहू-अकबर कहते हुए दरवाज़ा बंद कर दिया और गोलियां चलाने लगे. हम सबने किसी तरह छिपकर अपनी जान बचाई.''

कैफे के सुपरवाइज़र सुमोन रज़ा ने मीडिया को बताया, ''जब उन्होंने धमाका किया, पूरी इमारत थर्रा उठी.''

एक अन्य स्थानीय व्यक्ति तारिक़ मीर ने बताया, ''बाहर अफ़रा-तफ़री मची हुई थी. सड़कों को बंद कर दिया गया था. दर्जनों पुलिस कमांडो को तैनात किया गया था.''

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अधिकारियों का कहना है कि इस हमले में कुल 20 लोग मारे गए हैं जिनमें इटली, जापान, दक्षिण कोरिया और भारत के नागरिक शामिल हैं.

इस्लामिक स्टेट ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है. कुछ ख़बरों में कहा गया है कि हमलावरों ने बंधकों से क़ुरान की एक आयत दोहराने के लिए कहा, जो ऐसा कर पाए उन्हें छोड़ दिया गया जबकि बाकी को तड़पाकर मारा गया.

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