दुनियाभर की सेना के लिए ये कंपनी बनाती है वर्दी

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कभी पूरी दुनिया पर ब्रिटेन का राज हुआ करता था. कहते थे कि ब्रिटिश साम्राज्य में सूरज कभी नहीं डूबता था. वो दौर गुज़रे तो ज़माना बीत गया.
मगर ब्रिटेन की एक कंपनी आज भी पूरी दुनिया में अपना सिक्का या यूं कहें कि अपनी वर्दियां चला रही है.
इस ब्रिटिश कंपनी का नाम है वाईडीन. ब्रिटिश शहर यॉर्कशायर में है ये छोटी सी ख़ानदानी कंपनी, जिसका जलवा पूरी दुनिया पर क़ायम है.
ये कंपनी फ़ौजी और बड़े समारोहों की वर्दियां बनाती है. वाईडीन ने दुनिया के कई बड़े नेताओं से लेकर तानाशाहों तक के लिए वर्दियां बनाई हैं.
वाईडीन की स्थापना 1852 में हुई थी. तब ये कंपनी सिर्फ़ बारह तरह की चीज़ें बनाती थी.
लेकिन आज इसका दायरा इतना बड़ा हो चुका है कि आज वाईडीन दस हज़ार तरह के कपड़े और साज़-सज्जा का सामान बनाती है.

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इनमें से कुछ के डिज़ाइन तो उन्नीसवीं सदी से जस के तस हैं. ये कंपनी सऊदी अरब, फिजी, न्यूज़ीलैंड, नाईजीरिया और श्रीलंका की सेनाओं को वर्दी सप्लाई करती है. ब्रिटेन की फ़ौज तो उसकी सबसे बड़ी ग्राहक है.
इस कंपनी के उत्पाद बेहद ख़ास हैं. फिर भी इसका मुक़ाबला, सैनिक साज़ो-सामान बनाने वाली दुनिया की दूसरी बड़ी कंपनियों से होता है.
इनमें से कई कंपनियां तो एशिया में हैं जहां पर मज़दूरी सस्ती है.
कंपनी का कहना है कि पिछली डेढ़ सदी से ऊंचे पायदान पर बने रहने के लिए उसने सिर्फ़ एक फॉर्मूला अपनाया है. वो है शोहरत को बनाए रखना.
वाईडीन का ब्रिटिश फौज और रक्षा मंत्रालय से बहुत पुराना और गहरा नाता रहा है.
इसी वजह से दूसरे देशों की सेनाएं और सरकारें वाईडीन पर ऐतबार करती हैं. अब तो उनके ग्राहकों में संयुक्त राष्ट्र संघ से लेकर साठ दूसरे देश तक शामिल हैं.
कंपनी के प्रबंध निदेशक रॉबिन राइट कहते हैं कि वाईडीन हर साल ब्रिटिश सरकार को क़रीब तीस लाख डॉलर का सामान बेचती है.

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इसमें समारोहों में पहनी जाने वाली ख़ास पोशाक से लेकर दूसरे सैन्य साज़ो सामान शामिल हैं.
ये कंपनी के कुल टर्नओवर का आधा है. इसके अलावा ब्रिटिश शाही परिवार के सदस्य भी कई बार कंपनी के बनाए लिबास पहनते हैं.
ब्रिटिश साम्राज्यवाद के दौर के सियासी रिश्ते आज भी वाईडीन के काम आ रहे हैं.
ब्रिटेन के पुराने उपनिवेश रहे कई देश, वाईडीन के ग्राहक हैं. कंपनी अपने कई उत्पाद, पाकिस्तान में बनाती है.
रॉबिन राइट कहते हैं कि इंग्लैंड से आज़ाद होने के बरसों बाद भी पुराने ब्रिटिश उपनिवेश आज भी उस दौर की वर्दी की नक़ल करते हैं.
ब्रिटिश कॉमनवेल्थ के कई देशों की फौजी वर्दियां, ब्रिटेन की सेना से मिलती हैं. वाईडीन को इसका ख़ूब फ़ायदा मिलता है.
वाईडीन ने कई कुख्यात तानाशाहों की सेनाओं को भी वर्दियां बेची हैं. मसलन, सद्दाम हुसैन, ईदी अमीन और मुअम्मर गद्दाफ़ी.

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हालांकि रॉबिन राइट ये कहकर अपना बचाव करते हैं कि कंपनी ने इन तानाशाहों को सीधे सामान नहीं बेचा. सौदा हमेशा किसी बिचौलिए के ज़रिए हुआ.
वैसे तो वाईडीन, रोज़मर्रा इस्तेमाल होने वाली फौजी वर्दी भी बनाती है. मगर आम तौर पर उसके प्रोडक्ट सैन्य समारोहों के लिए होते हैं.
आख़िर ताक़त के साथ ही आता है इसका जश्न. विजय जुलूसों के लिए, सम्मान समारोहों के लिए ख़ास फौजी लिबास की ज़रूरत होती है. वाईडीन ऐसी पोशाक बनाने की उस्ताद है.
जैसे कि अभी हाल ही में श्रीलंका में गृह युद्ध के ख़ात्मे के बाद, विक्ट्री परेड के लिए वाईडीन को लिबास तैयार करने का हुक्म मिला था.
तानाशाहों से सौदे करने के फ़ायदे भी हैं और जंग के बीच कारोबार के नुक़सान भी हैं.
वाईडीन को भी इसके झटके झेलने पड़े हैं. 1979 में कंपनी को घाना से एक बड़ा ऑर्डर मिला था.

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लेकिन वहां अचानक तख़्ता पलट हो गया. नए तानाशाह ने पुराना ऑर्डर रद्द कर दिया. इससे कंपनी को मोटी रक़म का नुक़सान हुआ था.
हालांकि कंपनी ने इस घटना से सबक़ लिया. अब भी उसका ज़ोर विदेशी सौदों पर है. मगर, इसमें वो काफ़ी एहतियात बरतती है.
रॉबिन राइट कहते हैं कि देसी सौदों यानी ब्रिटिश सरकार से कारोबार के अलावा वो विदेशी सौदों को काफ़ी अहमियत देते हैं.
क्योंकि ब्रिटेन तो अपने सैन्य ख़र्च में कटौती कर रहा है. ऐसे में वाईडीन का भविष्य विदेशी कारोबार पर ही ज़्यादा टिका है.
लेकिन, आज की तारीख़ में ब्रिटिश सरकार से कारोबार, वाईडीन की कामयाबी की धुरी है.
वैसे अब कंपनी, खाड़ी देशों में अपना कारोबार बढ़ाने पर ज़ोर दे रही है. खाड़ी देशों में ब्रिटिश फौजी लिबास को काफ़ी पसंद किया जाता है.
इसे लोग सम्मान की नज़र से देखते हैं. जैसे कि सऊदी नेशनल गार्ड्स, वाईडीन की तैयार की हुई पोशाक ही पहनते हैं.
जैसे-जैसे वाईडीन के कारोबार का दायरा बढ़ रहा है. वैसे-वैसे इसके ग्राहकों के चेहरे भी बदल रहे हैं.

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आज ये कंपनी, बहुत सी फिल्म कंपनियों को भी अपने प्रोडक्ट की सप्लाई करती है. जैसे की फौजी लिबास, कमरबंद, फीते, पट्टियां और अंगरखे वग़ैरह.
कई फ़िल्मों में कलाकारों ने वाईडीन कंपनी की बनाई पोशाकें पहनी हैं. जैसे कि सेविंग प्राइवेट रेयॉन या द लॉर्ड्स ऑफ रिंग, द लास्ट समुराई या फिर इंडियाना जोन्स.
हॉलीवुड फ़िल्मों के अलावा वाईडीन ने कई बड़े सितारों को भी पोशाक पहनाई है.
इनमें माइकल जैक्सन भी शामिल थे. जैक्सन के दर्जी ने कंपनी से उनके लिए पोशाक ख़रीदी.
मगर वो इसमें कुछ फेरबदल चाहते थे. जैक्सन को ठंडा महसूस हो, इसके लिए उनके लिए ख़ास लिबास तैयार किया गया.
उसके अंदर ठंडा करने के लिए एक छोटी सी रेफ्रिजरेशन मशीन लगाई गई थी.
पिछली डेढ़ सदी के अपने इतिहास में वाईडीन ने बहुत से उतार-चढ़ाव देखे हैं.
मगर जब तक दुनिया में युद्ध लड़े जाते रहेंगे. या जंगों पर फ़िल्में बनती रहेंगी, तब तक वाईडीन का धंधा चोखा रहेगा.
शाही समारोहों से लेकर विजय जुलूसों तक, लोग वाईडीन के बनाए लिबास पहनते रहेंगे.
(अंग्रेज़ी में मूल लेख पढ़ने के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="http://www.bbc.com/capital/story/20160607-the-firm-outfitting-the-worlds-armies" platform="highweb"/></link>, जो <link type="page"><caption> बीबीसी कैपिटल</caption><url href="http://www.bbc.com/capital" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.)
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