डीएनए टेस्ट से बनेंगे आप ख़ूबसूरत !

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पैसे हों तो लोग तमाम तरह के शौक़ पाल लेते हैं. जैसे कि पश्चिमी देशों में रईसों को नया शौक़ चढ़ा है.
ये है ख़ुद को ख़ूबसूरत बनाने के लिए डीएनए टेस्ट कराना. लंदन, बर्लिन, न्यूयॉर्क ही नहीं, हांगकांग और सिंगापुर तक में इन दिनों ख़ास ब्यूटी क्लिनिक खुल रहे हैं.
इनमें आपको बनाने संवारने से पहले आपका डीएनए टेस्ट किया जाता है.
इसके ज़रिए पता किया जाता है कि आपके शरीर को, आपकी त्वचा को किस तरह के ब्यूटी ट्रीटमेंट की ज़रूरत है.
लंदन में ऐसा ही क्लिनिक है, जेन्यू. यहां पर घुसते ही आपको लगता है कि आप किसी और ही दुनिया में आ गए हैं.
यहां ख़ूबसूरत महिलाएं, सफ़ेद कोट पहने, गाढ़ी लाल लिपस्टिक लगाए, ऊंची एड़ियों वाले सैंडल्स में घूमती दिखेंगी. यहां छह महीने के कोर्स की क़ीमत है क़रीब तीन लाख रुपए.
सवाल ये है कि आख़िर चेहरे पर लगाने वाली एक क्रीम के लिए लोग इतना पैसा ख़र्च करने को क्यों तैयार हैं?
क्लिनिक का जवाब है कि ये क्रीम ख़ास उन्हीं लोगों के लिए बनाई गई है. जेन्यू कंपनी, किसी का भी ब्यूटी ट्रीटमेंट करने से पहले उनका डीएनए टेस्ट कराती है.
इससे पता चलता है कि स्किन को किस ख़ास तरह की क्रीम की ज़रूरत है. फिर वो क्रीम उसी इंसान के लिए तैयार की जाती है.

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जेन्यू का कहना है कि डीएनए टेस्ट से अपने बारे में जानकारी लेकर, हरदम जवां रहने का ट्रीटमेंट लेना, नए ज़माने का चलन है.
इस क्लिनिक में लोग अपनी लार का सैंपल देते हैं. इससे बेसिक डीएनए टेस्ट महज़ आधे घंटे में हो जाता है. या फिर इस सैंपल को लंदन के इंपीरियल कॉलेज भेजा जाता है जहां से 48 घंटों में टेस्ट के नतीजे आ जाते हैं.
इस टेस्ट में हर इंसान के एंटी ऑक्सीडेंट के बारे में पड़ताल की जाती है. जेन्यू का कहना है कि इसके ज़रिए पता चलता है कि किसी इंसान की त्वचा ख़ुद का कितना बचाव कर सकती है.
बाक़ी की ज़रूरत पूरी करने के लिए उसका इलाज किया जाता है, ताकि त्वचा पर झुर्रियां न पड़ें.
जून 2014 में 2000 ब्रितानी नागरिकों के बीच एक सर्वे हुआ था. कमोबेश आधे लोगों ने वैज्ञानिक तरीक़े से ब्यूटी ट्रीटमेंट लेने की ख़्वाहिश जताई थी.
इसके लिए लोग लैब में जाने के लिए भी तैयार थे. 54 फ़ीसदी लोग टेस्ट के लिए अपना ख़ून, बाल या त्वचा का एक टुकड़ा भी देने को तैयार थे.
वैसे वैज्ञानिक इन महंगे क्लिनिकों के दावों पर सवाल उठाते हैं.

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लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज के निकोलस लुसकॉम्ब कहते हैं कि त्वचा पर हमारी उम्र का असर दिखने की बड़ी वजह हमारा माहौल होता है.
ऐसे में जिन दो जीन में फ़र्क़ को बुनियाद बनाकर ये ब्यूटी ट्रीटमेंट दिए जा रहे हैं, उन पर भरोसा करना मुश्किल है. वो ये भी कहते हैं कि त्वचा पर एंटी ऑक्सीडेंट का कितना असर होता है, होता भी है या नहीं, कहना मुश्किल है.
लेकिन, वैज्ञानिकों की शंका एक तरफ़, लोगों की इस ख़ास ब्यूटी ट्रीटमेंट में दिलचस्पी बढ़ती जा रही है.
लंदन की मार्टिन पेरेमैन्स पिछले दो साल से जेन्यू आ रही हैं. वो कहती हैं कि उनकी त्वचा बहुत ख़ुश्क थी.
ऐसे में वो ख़ास अपनी स्किन के लिए ब्यूटी ट्रीटमेंट चाहती थीं. बाज़ार में ऐसा कुछ नहीं मिला तो वो जेन्यू आईं. वो कहती हैं कि ट्रीटमेंट का रोज़ाना असर तो नहीं दिखता. मगर जैसे ही वो क्लिनिक जाना बंद करती हैं, असर दिखने लगता है. उन्हें इलाज से तसल्ली है.
वैसे सिर्फ़ ख़ूबसूरती निखारने के लिए ही डीएनए टेस्ट नहीं हो रहे. अमरीका में एनसेस्ट्री डीएनए जैसी कंपनियां आपके पुरखों, आपके ख़ानदान के बारे में बताने के लिए भी डीएनए टेस्ट कर रही हैं.
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हर इंसान की जेनेटिक बनावट अलग होती है. इसी वजह से लोग अलग अलग दिखते हैं. अलग बीमारियों के शिकार होते हैं.
किसी को दिल की बीमारी होती है तो किसी को डायबिटीज़. कई लोग अपनी कमियों पर वर्ज़िश से काबू पा लेते हैं, तो कुछ को खान-पान में बदलाव करना पड़ता है.
कुछ ऐसे भी होते हैं जिन्हें दवाओं की ज़रूरत होती है.
और भी ऊंचे दर्जे के डीएनए टेस्ट से ये पता लगाया जा सकता है कि आपके अंदर पार्किंसन या सिस्टिक फाइब्रोसिस जैसी गंभीर बीमारियों के जीन तो नहीं. हालांकि टेस्ट करने वाले ये नहीं बता पाते कि आगे चलकर आपको ये बीमारी होगी या नहीं.
फिर भी आपको ये तो पता चल जाता है कि आपके ख़ानदान में किसी ख़ास बीमारी के जीन तो नहीं. उनसे एहतियात बरतने में आसानी होती है.
ब्रिटेन में 23एंडमी के नाम से एक कंपनी जीन मैपिंग करती है. कई लोगों ने इसकी मदद से ख़ुद के बारे में जानकारी हासिल की है. मसलन लंदन में रहने वाली कैटरीना शैंडलर. उन्हें गोद लिया गया था. इसलिए उन्हें अपने असली मां-बाप के बारे में कुछ पता नहीं था.

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लेकिन 23एंडमी में जीन मैपिंग कराने के बाद पता चला कि वो चीनी और अमरीकी मां-बाप की औलाद हैं. वो दक्षिण पूर्वी एशिया से ताल्लुक़ रखती हैं.
कैटरीना बताती हैं कि जब भी वो डॉक्टर के पास जाती हैं उन्हें अपने ख़ानदान की बीमारियों के बारे में बताना पड़ता है. अब इस टेस्ट की मदद से वो इन सवालों के जवाब दे सकती हैं.
लंदन में जिम चलाने वाले मैट रॉबर्ट्स कहते हैं कि डीएनए टेस्ट से तस्वीर साफ़ हो जाती है. आप हां या ना के चक्कर से निकल जाते हैं. इससे पता चल जाता है कि आपके इलाज में क्या चीज़ें ज़्यादा असरदार होंगी.
वैसे कई लोग मानते हैं कि डीएनए मैपिंग या जीन टेस्टिंग के फ़ायदों को बढ़ा-चढाकर पेश किया जाता है. जीन वॉच रिसर्च ग्रुप से जुड़ी वैज्ञानिक डॉक्टर हेलेन वैलेस इनमें से एक हैं.

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डॉक्टर हेलेन कहती हैं कि ज़्यादातर आम बीमारियों का ताल्लुक़ जीन से नहीं होता. अब कोई ये कैसे बता सकता है कि आपको अच्छा खाना खाना चाहिए, या आपको सिगरेट नहीं पीनी चाहिए, या फिर आपको वर्ज़िश करनी चाहिए. ये तो बहुत आम बातें हैं.
कुछ ख़ास तरह के कैंसर और दूसरी बीमारियां हैं जो जीन में हेर-फेर की वजह से होती हैं. लेकिन उनकी पड़ताल इतनी आसान नहीं होती, जितना कि इन महंगी क्लिनिक के दावे हैं.
डॉक्टर हेलेन कहती हैं कि ऐसे जीन या डीएनए टेस्ट से बचना चाहिए जो सीधे ग्राहकों को सुझाए जा रहे हैं.
हालांकि निकोलस लुसकॉम्ब कहते हैं कि अपने बारे में जानने की दिलचस्पी हर इंसान को रहती है. इसलिए छोटे-मोटे डीएनए टेस्ट कराने में कोई हर्ज़ नहीं.
असली बात ये है कि उस जानकारी को आप कैसे समझते हैं. कैसे इस्तेमाल करते हैं. कैसे उसकी मदद से अपनी सेहत बेहतर कर सकते हैं.
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