दुनिया के नेता भी दो हिस्सों में बँटे

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यूरोपीय संघ में ब्रिटेन के रहने या न रहने पर हुए जनमत संग्रह पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.

कुछ नेताओं ने जहां इस पहल का स्वागत किया वहीं कुछ नेताओं ने 'अब हमारी बारी' का ऐलान तक कर दिया है.

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मार्टिन शुल्ज़, यूरोपीय संसद के निदेशक हैं, उनका कहना है, 'हम इस परिणाम का आदर करते हैं. स्पष्ट हो गया है कि ब्रिटेन अब अपने चुने हुए रास्ते पर जाएगा. समय आ गया है कि हम संजीदगी से और विश्वसनीयता के साथ काम करें. डेविड कैमरन के पास अब देश की बड़ी जिम्मेदारी है.

वे आगे कहते हैं कि 'आप देख सकते हैं कि शेयर बाज़ार में पाउंड के साथ क्या हो रहा है? मैं नहीं चाहता कि यही कुछ यूरो के साथ भी हो.'

डच फ्रीडम पार्टी के लीडर गर्ट विल्डर्स ने ट्वीट किया है कि ब्रिटेन के लिए 'हुर्राह,' अब हमारी बारी है, अब समय नीदरलैंड में जनमत संग्रह का है.'

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैलकम टर्नबुल कहते हैं कि 'इस जनमत संग्रह का सीधा प्रभाव ऑस्ट्रेलिया पर पड़ेगा. अगर कानूनी पक्ष देखें तो यह बहुत सीमित होगा क्योंकि ब्रिटेन को यूरोपीय संघ को छोड़ने में कुछ साल लगेंगे जबकि हम शेयर बाज़ार में भारी गिरावट देख रहे हैं.'

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जर्मनी के विदेश मंत्री फ्रैंक वॉल्टर ने ब्रिटेन के इस कदम पर निराशा जाहिर करते हुए लिखा है कि 'आज का दिन यूरोप और ब्रिटेन के लिए काफी दुखद है.'

जर्मनी के वाइस चांसलर सिग्मर गैबरिएल लिखते हैं ''यह यूरोप के लिए ख़राब दिन है.''

पोलैंड के विदेश मंत्री विटोल्ड वॉचस्वॉस्की कहते हैं कि 'ब्रिटेन और यूरोप दोनों के लिए 'ब्रेक्सिस्ट' बुऱी ख़बर की तरह है, इसका मतलब है कि यूरोपीय संघ के सिद्धांत में बदलाव की जरूरत है.

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