पूर्व नाज़ियों को जर्मनी से मिल रही पेंशन

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बेल्जियम के एक मंत्री ने 2,500 बेल्जियम में रह रहे पूर्व नाज़ियों को जर्मन सरकार की ओर से पेंशन जारी रखने पर सवाल उठाए हैं.
नाज़ी नरसंहार से बच गए बेल्जियम के पीड़ितों ने सरकार से पेंशन रोकने की अपील की है.
पेंशन मंत्री डेनियनल बैक्वेलेन के प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा कि मंत्री पीड़ितों के साथ हैं.
गेराल्डीन लामोरेक्स ने कहा कि, "इन भुगतानों का बंदोबस्त जर्मनी करता है और इसे पाने वालों का कोई आधिकारिक आंकड़ा हमारे पास नहीं है."
नाज़ियों से 1945 में मुक्ति मिलने के बाद नाज़ियों का साथ देने वाले 57,000 बेल्जियम वासियों को सज़ा हुई थी.

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जर्मन एसएस और वेहख़माच में इन्हें भर्ती किया गया था और इन्होंने यहूदियों और विरोधी सैनिकों को कंसन्ट्रेशन कैंपों (यानी प्रताड़ना करने की जगह) में भेजने में नाज़ियों की मदद की थी.
नाज़ी कैंपों में मौत से बच गए बेल्जियम वासियों के एस संगठन मेमोरियल ग्रुप ने जर्मन पेंशन भुगतानों को रोकने के लिए अपील की है.
बेल्जियम टीवी आरटीबीएफ़ ने इस ग्रुप के अध्यक्ष पीटर पॉल बाएतेन के हवाले से कहा है, "यह दुख की बात है. बेल्जियम पेंशन पाने वालों की सूचनाएं नहीं रख सकता है या वो चाहता ही नहीं है?"
पीटर ने कहा, "लेकिन मैं ये नहीं समझ पा रहा हूं कि आज के यूरोप में बेल्जियम और जर्मनी इन सूचनाओं को क्यों नहीं साझा कर सकते."
हालांकि अभी ये साफ़ नहीं है कि जो लोग पेंशन पा रहे हैं क्या वो सभी बेल्जियम में रह रहे हैं.
लामोरेक्स ने कहा कि इसका हल निकालने के लिए पेंशन मंत्री अन्य मंत्रालयों के साथ बैठकर बात करेंगे.
युद्ध ख़त्म होने के बाद लियोन डीग्रेल, जोकि बेल्जियम में नाज़ी सहयोगियों के नेता थे, फ़सीवादी स्पेन भाग गए, जहां फ़्रांको तानाशाही ने उन्हें पनाह दी. 1994 में उनकी मौत हो गई.

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बेल्जियम ने उन्हें देशद्रोही घोषित कर मौत की सज़ा दी थी, लेकिन फ़्रांको की मौत के बाद और 1975 में फिर से लोकतंत्र स्थापित होने के बाद भी वो वहीं रहे.
2007 में बेल्जियम के इतिहासकारों ने निष्कर्ष निकाला कि 1940 में नाज़ियों के आने के बाद यहूदियों के नरसंहार में बेल्जियम के उसके सहयोगियों ने मदद की थी.
2012 में संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में जर्मन सरकार ने कहा था कि वो इस बात की पुष्टि नहीं कर सकती कि पेंशन पाने वाले बेल्जियम के नाज़ी सहयोगियों की संख्या 2,500 है.
जब उन लोगों के बारे में पूछा गया तो जर्मन सरकार ने यह संख्या 57 बताई थी, जिन्हें भुगतान मिल रहा था. लेकिन इसमें ये नहीं बताया गया था कि वो लोग कौन हैं.
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