23 साल बाद खुली बोस्निया की मस्जिद

फ़रहादिजा

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बोस्निया की फ़रहात पाशा मस्जिद दोबारा श्रद्धालुओं के लिए शनिवार को खोल दिया गया. इस दौरान दस हज़ार से ज़्यादा लोग यहां मौजूद थे.

1992-1995 युद्ध में सर्बो ने इस मस्जिद को नष्ट दिया था जो सीधे बोस्निया की सदियों पुरानी धर्मनिरपेक्षता पर हमला था.

फ़रहात पाशा मस्जिद को फ़रहादिजा के नाम से भी जाना जाता है जो 16वीं सदी की तुर्क वास्तुकला का एक नायाब उदाहरण है.

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ये मस्जिद बंजा लुका के 16 और देशों की 534 मस्जिदों में से एक है जिसे बोस्नियाई सर्बों ने नष्ट करने की कोशिश की.

कोशिश थी कि बोस्निया के उस हिस्से को पड़ोसी सर्बिया का हिस्सा बना लिया जाए.

तथाकथित 'जातीय सफ़ाई' योजना के तहत रोमन कैथोलिक क्रोएट्स और गैर-सर्ब भी निशाना बनाए गए.

उन्हें घर से निकालने, संपत्ति लूटपाट, कुछ की हत्या और कुछ को अलग शिविरों में रखने जैसी यातनाएं दी गईं.

फ़रहादिजा

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धरोहरों को नुक़सान पहुंचाकर सर्ब चाहते थे कि ये लोग दोबारा अपने घर न लौटे.

1995 में एक लाख़ से ज्यादा लोगों की हत्या के बाद एक शांति समझौते ने देश को दो हिस्सों में बांट दिया.

समझौते में शरणार्थियों को अपने पुराने घरों में लौटने और फ़रहादिजा मस्जिद के दोबारा निर्माण की गारंटी दी गई थी.

फ़रहादिजा

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लेकिन 2001 में नींव रखते समय सर्बिया की राष्ट्रवादी भीड़ ने अड़चन डाली. इसमें एक मुस्लिम की मौत हो गई थी और दर्जनों घायल हुए थे.

नाटो सेनाओं को हेलीकॉप्टरों से समारोह में मौजूद विदेशी राजदूतों को वहां से सुरक्षित निकालना पड़ा था.

मस्जिद के तीन हज़ार पांच सौ टुकड़ों को इकट्ठा कर मस्जिद के हिस्सों में लगाया गया. इसके पुनर्निर्माण में 15 साल का वक़्त लगा.

शनिवार को फ़रहादिजा मस्जिद गिराने की 23वीं बरसी के मौके पर बोस्नियाई सर्ब अधिकारियों ने इस समारोह की सुरक्षा के लिए हज़ार से ज़्यादा पुलिसवालों को तैनात किया था.

प्रधानमंत्री अहमत दावूतोग्लू

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इस समारोह में तुर्की के निवर्तमान प्रधानमंत्री, बोस्नियाई नेता, विदेशी राजदूत और रोमन कैथोलिक, सर्ब रूढ़िवादी चर्च और यहूदी समुदाय के प्रतिनिधियों ने शिरकत की.

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