'ऐसे करें शादियां और अंतिम संस्कार'

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चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने पिछले साल अक्तूबर में अपने सदस्यों के लिए शादी और अंतिम संस्कार को किफ़ायती ढंग से आयोजित करने को लेकर कुछ निर्देश जारी किए थे.
हाल ही में पार्टी ने अपने आठ करोड़ 80 लाख सदस्यों के लिए एक बयान जारी कर बताया है कि पार्टी के किफ़ायत अभियान के तहत इन निर्देशों का कैसे पालन किया जाना है.
हालांकि यह सब भ्रष्टाचार उन्मूलन के नाम पर किया जा रहा है लेकिन जीवन के सबसे महत्वपूर्ण मौकों पर इसे 'दखल' मानते हुए इंटरनेट पर इसका विरोध भी शुरू हो गया है.
1. शादी या अंतिम संस्कार से फ़ायदा न लें

पारंपरिक रूप से चीन में शादी पर दूल्हा और दुल्हन को और मृत्यु पर शोक संतप्त परिवार को कुछ नकद देने का रिवाज़ है.
शादी में विवाहित जोड़े को उपहार शुभकामना स्वरूप दिए जाते हैं तो अंतिम संस्कार में दिए जाने वाला पैसा सांत्वना जताने के साथ ही कार्यक्रम में होने वाले ख़र्च में मदद माना जाता है.
चीनी संस्कृति में शादी और अंतिम संस्कार किसी भी व्यक्ति की सामाजिक हैसियत बताने वाले प्रमुख मौके होते हैं और इन्हें धूमधाम से मनाने पर ज़ोर रहता है.
अब पार्टी के सदस्यों को 'बड़ी भव्य पार्टियां' आयोजित करने के प्रति हतोत्साहित किया जा रहा है.

वह शादी और अंतिम संस्कारों का इस्तेमाल 'पैसा बनाने के मौके' के रूप में भी नहीं कर सकते इसलिए ऐसे मौक़ों पर पैसा लेने और देने की परंपरा पर भी नाराज़गी बढ़ गई है.
पार्टी के वॉचडॉग (ऐसे मामलों पर नज़र रखने वाली संस्था) ने देखा कि कई बार सदस्य ऐसे आयोजन 'बहुत बड़े पैमाने पर करते हैं और बहुत से लोगों को बुलाते हैं' ताकि इससे उन्हें 'बड़ी मात्रा में उपहार' मिल सकें.
2. सिरदर्द न बन जाएं
छोटे गांवों में शादियां और अंतिम संस्कार कई दिन तक चलते हैं और इनमें बड़े-भारी जुलूस (बारात) होते हैं.

इसलिए पार्टी की ओर से जारी दिशानिर्देशों में कहा गया है कि ऐसे आयोजन "रोज़मर्रा के उत्पादन, जीवन, कार्य, व्यवसाय, शिक्षण, शोध, यातायात आदि को बाधित नहीं कर सकते".
इसमें यह भी कहा गया है कि ऐसे आयोजनों में इसके लिए पर्याप्त उपाय किए जाने चाहिए कि लोग 'घायल न हों या मारे न जाएं' और ये 'लोगों, समाज और देश के हितों का उल्लंघन न करें'.
3. पुरानी परंपराओं को छोड़ आगे बढ़ें
सदस्यों को प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वे अपनी स्थानीय परंपराओं का आंख-मूंदकर पालन न करें, हालांकि वॉचडॉग इस पर ज़ोर देता है कि वह स्थानीय परंपराओं पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की बात नहीं कर रहा.

इसका कहना है, "सदस्यों को, ख़ासकर नेताओं को ध्यान रखना चाहिए कि उनका आम लोगों पर ख़राब प्रभाव पड़ सकता है और इसलिए उन्हें परंपराओं के साथ ही सामान्य और साधारण शादियों और अंतिम संस्कार के आयोजन पर ध्यान देना चाहिए."
लेकिन इन स्पष्टीकरण का कुछ लोगों पर कतई प्रभाव नहीं पड़ा क्योंकि इंटरनेट पर लोगों का गुस्सा इस पर ख़ासा बढ़ गया.
माइक्रोब्लॉगिंग नेटवर्क वीबो पर बहुत से लोगों की शिकायत रही कि ये नियम बहुत भारी और सख़्त हैं.
एक यूज़र लिखते हैं, "इन नियमों का बहुत सख़्ती से पालन कराया जा रहा है, और तो और सामान्य नागरिकों पर भी इन्हें लागू किया जा रहा है."

एक दूसरे ने मज़ाक किया, "शादी समारोह से देश के हितों को नुक़सान हो सकता है? क्या आप दलाई लामा से शादी की बात कर रहे हैं?"












