'आईएस में 8 से 12 साल के आत्मघाती हमलावर'

आईएसआईएस के बच्चे
    • Author, जेम्स लॉन्गमैन
    • पदनाम, बीबीसी विक्टोरिया डर्बीशायर प्रोग्राम

एक रिपोर्ट के मुताबिक़ ख़ुद को इस्लामिक स्टेट कहने वाले चरमपंथी संगठन के लिए लड़ते हुए मरने वाले बच्चों की संख्या पहले के एक अनुमान से लगभग दोगुनी हो गई है.

अमरीका की जॉर्जिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने आईएस के प्रचार पर 13 महीने तक नज़र रखने के बाद ये निष्कर्ष निकाला है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएस 8 से 12 साल तक बच्चों को आत्मघाती हमलावर बना रहा है.

आईएस के प्रचार में ये दावा किया गया है कि लड़ाई में अलग-अलग भूमिकाओं में लड़ते हुए आठ से 18 साल के 89 लड़कों की मौत हो गई है.

शोधकर्ताओं के अनुसार 2014 में इससे तिगुनी संख्या में बच्चे लड़ाई में शामिल हुए.

अमरीकी सेना के चरमपंथ प्रतिरोधक केन्द्र ने आंकड़े जारी किए थे जिसके मुताबिक जनवरी 2015 से जनवरी 2016 के बीच 39 फ़ीसदी बच्चे आत्मघाती हमलों में मारे गए और 33 फ़ीसदी बच्चों की लड़ाई में मौत हो गई.

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इमेज स्रोत, AP

रिपोर्ट के एक लेखक चार्ली विंटर ने बीबीसी से कहा, "ये लगभग तय है कि ज़्यादा बच्चों की मौत हुई होगी. ये आंकड़े वो हैं जो आईएस ने सार्वजनिक किए हैं."

आईएस ने बच्चों के नाम और जानकारी नहीं दी है लेकिन शोधकर्ताओं का अनुमान है कि मारे गए बच्चों में 60 फ़ीसदी बच्चे 12 से 16 साल के हैं और छह फ़ीसदी बच्चे 8 से 12 साल की उम्र के हैं.

18 फ़ीसदी बच्चे ऐसे फ़िदाइन (कथित 'इंघिमसीस') थे जिनका लड़ाई में बचने का कोई इरादा नहीं होता, ये लड़ाके अपनी मौत तक दुश्मन के सामने खुली फ़ायरिंग करते हैं.

सबसे कम उम्र के आत्मघाती हमलवर की उम्र 8 से 12 साल के बीच बताई जाती है, जिसकी मौत पिछले महीने एलेपो में हुई है. आईएस ने इस आत्मघाती हमलावर की तस्वीर जारी की थी जिसमें वो अपने पिता को अलविदा कह रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक आधे से ज़्यादा बच्चों की मौत इराक में हुई है लेकिन ज़्यादातर बच्चे सीरिया के थे.

इससे ये साफ़ है कि आईएस सीरिया में बच्चों को प्रशिक्षण देता है और इराक में लड़ने के लिए भेजता है.

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