मोटापा, काली महिला और औपनिवेशिक मज़ाक

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- Author, जस्टिन पार्किंसन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दो सौ साल पहले अपने शरीर के काफ़ी मोटे पिछले हिस्से की वजह से चर्चा में रही सारा बार्टमैन एक बार फिर सुर्खियों में हैं.
कहा जा रहा है कि उनके जीवन पर हॉलीवुड में एक और फ़िल्म बनने की तैयारी हो रही है.
एक ख़ास रोग की वजह से उनके शरीर का पिछला हिस्सा अस्वाभाविक रूप से मोटा हो गया था. एक अंग्रेज डॉक्टर इसका फ़ायदा उठा कर उन्हें ब्रिटेन ले आए और उन्हें शो में पेश किया जाने लगा.
यह शो इतना लोकप्रिय हुआ कि उनकी मौत के बाद भी चलता रहा. उनके नहीं रहने पर लोग उनका मस्तिष्क, कंकाल और गुप्तांग देखने के लिए आते थे.

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पेरिस के एक म्यूज़ियम में उनकी ये चीजें 1974 तक रखी गई थीं, जबकि सारा की मौत 29 दिसंबर 1815 को हो गई थी.
आज उन्हें औपनिवेशिक शोषण, रंगभेद और काले लोगों को केंद्र में रख कर किए जा रहे मज़ाक का प्रतीक माना जाता है.
कहा जा रहा है कि गायिका बेयोंसी कहानी लिखेंगी और ख़ुद ही सारा की भूमिका निभाएंगी, हालांकि उनके प्रवक्ता ने इससे इंकार किया है.
बार्टमैन खोईखोई समुदाय की थीं. इस समुदाय के प्रमुख ज्यां बर्जेस ने कहा है कि बेयोंसी में यह मानवीय गरिमा नहीं है कि वे सारा की कहानी लिखे, उनके चरित्र को निभाना तो दूर की बात है.
सारा बार्टमैन का जन्म दक्षिण अफ्रीका के ईस्टर्न केप में 1789 में हुआ था. वे दो साल की थीं जब उनकी मां चल बसीं और किशोर उम्र के होते होते उनके सिर से पिता का साया भी उठ गया.

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वे बड़ी होने पर दक्षिण अफ्रीका में घरेलू नौकरानी का काम करने लगीं. उनके साथी की हत्या कर दी गई और उनका एक नवजात बच्चा भी मर गया.
वे पढ़ी लिखी नहीं थीं. कहा जाता है कि एक अंग्रेज़ सर्जन विलियम डनलप और हेंड्रिक सीज़र के साथ उन्होंने 1810 में एक क़रार किया. इसमें तय हुआ कि वे यूरोप जाएंगी और शो में हिस्सा लेंगी.
उन्हें 'हॉटनटॉट वीनस' कह कर प्रचारित किया गया. इस शो में लोग उनके अस्वाभाविक रूप से मोटे हिस्से को देखने आते थे.
रैशेल होम्स ने उन पर किताब लिखी, "द हॉटनटॉट वीनस: लाइफ़ एंड डेथ ऑफ़ सार्तेजी बार्टमैन". उन्होंने इसमें लिखा कि उस ज़माने में महिलाओं के शरीर के पिछले हिस्से का मोटा होना फ़ैशनेबल माना जाता था.
उस समय के राजनेता लॉ़र्ड ग्रैनविल के शरीर का भी पिछला हिस्सा काफ़ी मोटा था. यह भी कहा गया कि उन्होंने अपने प्रचार के लिए सारा बार्टमैन का इस्तेमाल किया.
सारा 1814 में सीज़र के साथ पेरिस चली गईं. उन्हें वहां हाई सोसाइटी की पार्टियों में भेजा जाने लगा, वे काफ़ी ज्यादा शराब पीने लगीं.
सिर्फ 26 साल की उम्र में सारा की मौत हो गई.
प्रकृतिशास्त्री जॉर्ज काविया ने सारा की देह का खाका प्लास्टर में उतार लिया. इसे 1974 तक पेरिस के एक म्यूज़ियम में रखा गया था.

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नेल्सन मंडेला ने 1994 में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति बनने के बाद फ्रांस से आग्रह किया कि सारा की प्लास्टर आकृति और दूसरे अवशेष उन्हें लौटा दिए जाएं.
ये चीजें मार्च 2002 में दक्षिण अफ्रीका को दे दी गईं. बीते साल अगस्त में उनके अवशेष को इस्टर्न केप के हैंके में दफ़ना दिया गया.
सारा पर कई किताबें लिखी गईं, कई फिल्में बनीं.
साल 2010 में बनी 'ब्लैक वीनस' और 1998 में बनी 'द लाइफ़ एंड टाइम्स ऑफ़ सारा बार्टमैन' उनके जीवन पर ही आधारित थीं.
साल 2014 में पेपर पत्रिका में एक तस्वीर छपी, जिसमें किम करदाशियां को अपने शरीर के पिछले हिस्से पर बोतल लिए नाचते दिखाया गया. यह कहा गया कि करदाशियां ने दरअसल सारा की ही नकल की थी.
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