रवांडा के जनसंहार मामले में 6 लोग दोषी क़रार

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अफ्रीकी देश रवांडा में 1994 के जनसंहार मामले में इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्राब्यूनल ने अपना अंतिम फ़ैसला सुनाया है. इस मामले में अदालत ने छह लोगों को मानवता के ख़िलाफ़ अपराध का दोषी पाया है.
इससे पहले अदालत तंजानिया के शहर आरुशा में संयुक्त राष्ट्र की ओर से स्थापित अदालत ने कुल मिला कर 61 लोगों को दोषी ठहराया था.
रवांडा में 1994 में हुए जनसंहार में तीन महीने के भीतर करीब आठ लाख लोगों को जान से मार दिया गया था.
मामले के आठ अभियुक्त अभी भी फ़रार चल रहे हैं. हालांकि इस पूरी प्रक्रिया को रवांडा के राष्ट्रपति पॉल कागामे ने काफी जटिल और खर्चीला बताया है.
वहीं दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता डानफोर्ड मपूमिलवा ने ट्राब्यूनल का धन्यवाद किया है. डानफोर्ड ने कहा कि जनसंहार के मामले में कई हाईप्रोफ़ाइल लोगों को सज़ा मिली है, इनमें रवांडा के कई मंत्री और सेना के कमांडर भी शामिल हैं. अब इन्हें जेल में भेजा जाएगा.

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दरअसल 6 अप्रैल, 1994 को हाबयारिमाना और बुरुंडी के राष्ट्रपति केपरियल नतारयामिरा को ले कर जा रहे विमान को किगाली, रवांडा में गिराया गया था. जहाज में सवार सभी लोगों की मौत हो गई थी.
किसने ये जहाज गिराया था, इसका फ़ैसला अब तक नहीं हो पाया है. कुछ लोग इसके लिए हूतू चरमपंथियों को इसके लिए ज़िम्मेदार मानते हैं जबकि कुछ लोग रवांडा पैट्रिएक फ्रंट (आरपीएफ़) को.
हालांकि इस हादसे के कुछ ही घंटों के भीतर आरपीएएफ़ और हूतू चरमपंथियों ने तुत्सी समुदाय के लोगों की हत्या करनी शुरू कर दी.
रवांडा में हूतू समुदाय बहुसंख्यक हैं और तुत्सी समुदाय के लोग अल्पसंख्यक हैं. करीब तीन महीने में 8 लाख लोगों को मार दिया गया था.
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