भारत के रुख़ से नेपाली जनता को लगी ठेस?

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- Author, प्रतीक्षा घिल्डियाल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के नेता केपी ओली का कहना है कि नए संविधान को लेकर तराई के इलाक़े में अफ़वाहें फैलाई जा रही है जबकि अगर कोई विवाद है तो उसे बातचीत से हल किया जा सकता है.
प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे खड़गा प्रसाद ओली ने बीबीसी से विशेष बातचीत में कहा कि नेपाल के संविधान में सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए पर्याप्त क़दम उठाए गए हैं.
पिछले दिनों नेपाल में नया संविधान लागू किया गया लेकिन भारत के लगने वाले तराई के इलाके में इसका विरोध हो रहा है.
तराई के मधेसी और थारू लोग नए संविधान में अपने अधिकारों की अनदेखी किए जाने का आरोप लगा रहे हैं और वहां व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.
भारत और नेपाल के कूटनीतिक रिश्तों पर भी इस विवाद का असर देखने को मिल रहा है.
'आइए बात करें'
ओली का कहना है कि लोगों को भड़काया जा रहा है जबकि नए संविधान में नागरिकता का हक़, समानुपातिक प्रतिनिधित्व का हक़, समावेशी विकास का हक़, पिछड़े समुदाय के लिए विशेष नीति का हक़, सब कुछ शामिल है.
उन्होंने कहा, "लोगों को भड़काया जा रहा है. गांवों में लोगों को बोला जा रहा है कि संविधान तो आया लेकिन आप लोगों को क्या मिला."

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"संविधान दाल चालव की बोरी लेकर तो नहीं आएगा. संविधान से तो जनता को अधिकार मिलेंगे, इससे गैस का सिलेंडर तो नहीं मिलेगा."
नए संविधान से नाराज़ लोग नई समानुपातिक चुनाव व्यवस्था से ख़ुश नहीं है जिसके अनुसार संसद में उनका प्रतिनिधित्व कम हो सकता है.
वहीं कुछ जातीय समूह प्रस्तावित प्रांतों के सीमांकन से ख़ुश नहीं हैं.
लेकिन ओली का कहना है कि लंबी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के ज़रिए नेपाल को नए संविधान मिला है और अगर इस बारे में किसी कोई शिकायत है तो इस बारे में बात की जा सकती है.
उन्होंने कहा, "दुनिया के सभी संविधान संशोधनीय होते हैं. परिवर्तनीय होते हैं. गतिशील होते हैं. हमारा भी वैसा ही है."
ओली ने कहा, "मैं अंसुतष्ट साथियों, राजनीतिक दलों और उनके नेताओं को आग्रह करता हूं कि आइए बात करें."
'दूर हों ग़लतफ़हमियां'

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ओली ने नेपाल के नए संविधान को लेकर भारत के ठंडे रुख को लेकर भी निराशा जताई.
उनके मुताबिक, "सारी दुनिया ने नेपाल के नए संविधान का स्वागत किया लेकिन भारत ने इस बारे में कुछ नहीं बोला."
ओली ने कहा, "भारत के रुख़ से हो सकता है कि नेपाली जनता को ठेस लगी हो, लेकिन इसे ठीक किया जा सकता है. ऐसी ग़लतफ़हमियों को दूर करना चाहिए, भारत नेपाल के संबंधों को बिगड़ने नहीं देना चाहिए."

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