प्रवासियों पर कोटा व्यवस्था से कई देश नाराज़

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प्रवासियों के मुद्दे पर यूरोपीय संघ में दो फाड़ नज़र आ रहा है. मध्य यूरोपीय देशों ने उस योजना पर खुली नाराज़गी जताई है जिसके मुताबिक़ मध्य पूर्व से आने वाले एक लाख 20 हज़ार प्रवासियों को यूरोपीय संघ के देशों में जगह दी जानी है.
मंगलवार को ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ के गृह मंत्रियों की बैठक में इस कोटा व्यवस्था को मंज़ूरी दी गई थी. लेकिन रोमानिया, चेक गणराज्य, स्लोवाकिया और हंगरी ने शरणार्थियों को लेने की अनिवार्यता वाले इस प्रस्ताव के विरोध में मतदान किया.
चेक राष्ट्रपति मिलोस जमान का कहना है कि सिर्फ़ भविष्य ही बताएगा कि ये कितनी बड़ी ग़लती है.
समझदारी को मात

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ब्रसेल्स की बैठक में हिस्सा लेने आए चेक गणराज्य के गृह मंत्री मिलान चोवानेच ने अपनी निराशा जताते हुए कहा, ''हम ब्रसेल्स आए थे कि समझदारी वाली बात का बचाव कर सकें. लेकिन यहां समझदारी को मात मिली है, जो शर्म की बात है. हम देखेंगे कि आगे क्या होगा. चेक गणराज्य ने प्रस्ताव के ख़िलाफ़ वोट दिया है.''
वहीं जर्मनी और फ्रांस समेत यूरोपीय संघ के कई अहम देश इस कोटा व्यवस्था का समर्थन कर रहे हैं. इसके तहत ग्रीस, इटली और हंगरी में मौजूद प्रवासियों को अन्य यूरोपीय देशों में बसाया जाना है. नए प्रस्ताव के मुताबिक़ जो देश प्रवासियों को लेने से इनकार करेंगे, उन पर जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है.

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स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री ने भी नई कोटा व्यवस्था को मानने से इनकार कर दिया है. वहीं लातिविया में सैकड़ों लोगों ने सड़कों पर उतर इस कोटा व्यवस्था का विरोध किया है, हालांकि लातिविया के गृह मंत्री ने प्रस्ताव के हक़ में वोट दिया है.
वैसे ब्रसेल्स में यूरोपीय गृह मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता करने वाले लग्ज़मबर्ग के विदेश मंत्री ज्यौं एसेलबोर्न ने कहा कि उन्हें इस बात में कोई शक नहीं है कि कोटा व्यवस्था का विरोध करने वाले देश भी इसे लागू करेंगे.
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