मिस्र में अल जज़ीरा के पत्रकारों को सज़ा

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मिस्र की एक अदालत ने समाचार चैनल अल जज़ीरा के तीन पत्रकारों को कथित तौर पर गलत ख़बर देने के आरोप में तीन साल की सज़ा सुनाई है.
ये फ़ैसला तब आया जब दुनिया भर में इन पत्रकारों की रिहाई को लेकर अभियान छिड़ा हुआ है.
जिस वक़्त ये सज़ा सुनाई गई तब कनाडा के मोहम्मद फ़ाहमी और मिस्र के पत्रकार बाहेर मोहम्मद अदालत में ही मौजूद थे.

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वहीं ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार पीटर ग्रेस्टे को फ़रवरी में उनके देश वापस भेज दिया गया था.
फ़ैसले के बाद मोहम्मद फ़ाहमी की वकील ने कहा कि वे फ़ैसले से नाख़ुश हैं.
सज़ा सुनाए जाने के बाद पत्रकार पीटर ग्रेस्ट ने कहा है कि वे फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करेंगे.
उन्होंने कहा, "हम सभी कानूनी रास्ते खोज रहे हैं. यह अनैतिक है. फ़ैसले को यूं ही नहीं स्वीकारा जाएगा. हम चरमपंथी नहीं, हमने किसी प्रतिबंधित संगठन के साथ मिलकर काम नहीं किया. हमने कोई गलत ख़बर प्रसारित नहीं की."

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फ़ैसले के बाद मोहम्मद फ़ाहमी की मंगेतर ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फ़तह अल सीसी ने फ़ाहमी को कनाडा जाने की मंज़ूरी देने की अपील की है.
इन तीनों पत्रकारों पर प्रतिबंधित गुट मुस्लिम ब्रदरहुड की सहायता करने के आरोप लगे थे. यह तीनों ही इन आरोपों को बेबुनियाद बताते रहे हैं.
जुलाई 2014 में दिए गए फ़ैसले में मोहम्मद फ़ाहमी और पीटर ग्रेस्टे को सात साल और बाहेर मोहम्मद को 10 साल की सज़ा दी गई थी.
इस साल जनवरी में आए एक और फ़ैसले में अदालत ने तीनों पत्रकारों पर लगे आरोपों को ख़ारिज करते हुए दोबारा मुक़दमा चलाए जाने का आदेश दिया था.
शनिवार को अपने फ़ैसले में जज हसन फ़रीद ने कहा की ये तीनों पत्रकार बिना लाइसेंस लिए क़ाहिरा के एक होटल से काम कर रहे थे.

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अदालत ने मोहम्मद फाहमी और पीटर ग्रेस्टे को तीन तीन साल और बाहेर मोहम्मद को तीन साल छह महीनों की सज़ा सुनाई है.
अभी ये स्पष्ट नहीं है कि मोहम्मद फ़ाहमी और बाहेर मोहम्मद कितनी सज़ा और काटेंगे. फैसले आने से पहले ये दोनों पत्रकार लगभग एक साल की सज़ा काट चुके हैं.
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