भूकंप के बाद बढ़ती लड़कियों की तस्करी

- Author, संजय ढकाल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
नेपाल में अप्रैल-मई में आए भूकंप से प्रभावित इलाक़ों में लड़कियों की तस्करी के मामले सामने आ रहे हैं.
पिछले महीने भारतीय अधिकारियों ने 27 नेपाली लड़कियों को संदेह की बुनियाद पर पकड़ा जो भारत से दुबई जाने की कोशिश कर रही थीं.
भारतीय अधिकारियों ने जब उन लड़कियों को नेपाली दूतावास के अधिकारियों के हवाले किया तो पता चला कि इनमें से अधिकतर लड़कियां सिंधुपालचौक और गोरखा ज़िले की रहने वाली हैं.
नेपाल के सिंधुपालचौक और गोरखा दो ऐसे ज़िले हैं जहां भूकंप में दूसरी जगहों की तुलना में ज़्यादा तबाही हुई थी.
भूकंप में क़रीब नौ हज़ार लोग मारे गए थे. हज़ारों घर तबाह हो गए और लाखों लोगों की ज़िंदगी अस्त-व्यस्त हो गई थीं. जिसका फ़ायदा मानव तस्कर उठा रहे हैं.
विदेश भेज रहे हैं

आशंका अब इस बात की जताई जा रही है कि नेपाल के इस इलाक़े से और भी लड़कियों को तस्करी के ज़रिए विदेश भेजा गया होगा.
भारत में नेपाल के राजदूत दीप कुमार उपाध्याय बताते हैं, "सिंधुपाल चौक, नुवाकोट लड़कियों की तस्करी के लिए पहले भी सुर्खियों में रहे हैं. भूकंप से बुरी तरह प्रभावित होने के बाद समस्या और बढ़ गई है. यहां जागरुकता की कमी है."
पता चला है कि कुछ गिरोह संगठित तरीक़े से मानव तस्करी कर रहे हैं जो नेपाली लड़कियों को बहला फुसलाकर पहले भारत लाते हैं और फिर भारत से उन्हें दूसरे देशों में भेज देते हैं.
उपाध्याय कहते हैं, "कुछ लड़कियां तो ख़ुद दिल्ली चली आती हैं और फिर तस्करों के चंगुल में फंस जाती हैं. लेकिन ज़्यादातर लड़कियों को नेपाल में ही ठगा जाता है जहां बिचौलिए उन्हें विदेशों में अच्छी नौकरी के नाम पर धोखा देते हैं."
उम्र की सीमा

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खाड़ी के कई देशों में नेपाली लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार के मामले सामने आने के बाद नेपाल ने कामधंधे के लिए विदेश जाने वाली लड़कियों पर उम्र संबंधी कुछ प्रतिबंध लगा रखे हैं.
नेपाली लड़कियां खाड़ी देशों से आंसू बहाते हुए वापसी ना करें, ये सुनिश्चित करने के लिए इमिग्रेशन अधिकारी हवाई अड्डे पर पैनी नज़र भी रखते हैं.
नेपाल में भूकंप के फ़ौरन बाद इस बात की आशंका जताई गई थी कि जहां तबाही ज़्यादा हुई है, वहां मानव-तस्करी के मामले बढ़ जाएंगे. तब कई बच्चों की देश के भीतर ही तस्करी की कोशिश हुई थी जिसे रोकने में सफलता भी मिली थी.
दिल्ली में नेपाली दूतावास में वरिष्ठ अधिकारी शिवानी बताती हैं, "नेपाल में भूकंप प्रभावित इलाक़ों में लड़कियों की तस्करी की अधिक आशंका है. अभी जिन 27 नेपाली लड़कियों को बचाया गया है, उससे ये बात एक बार फिर साबित हो गई है. यही वजह है कि अब हम पहले से अधिक सतर्कता बरत रहे हैं."
समस्या की जड़

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नेपाली अधिकारी भारत और नेपाल दोनों देशों में पहले से अधिक सतर्कता भले ही बरत रहे हों, लेकिन सच ये है कि इस समस्या की जड़ नेपाल में ही है.
भारत में नेपाल के राजदूत दीप कुमार उपाध्याय कहते हैं, "हमें अपनी सीमाओं पर चौकसी बढ़ाने की ज़रूरत है ताकि कोई भी इस तरह से लड़कियों को सीमा पार ना करा सके. हमें नेपाली गांवों में जागरूकता बढ़ाने की भी ज़रूरत है. भारत सरकार भी हमारी मदद कर रही है. हमने भारतीय अधिकारियों से अनुरोध किया है कि ज़रा भी संदेह लगे तो नेपाली लड़कियों को हवाई अड्डे पर ही रोक लिया जाए."
नेपाल सरकार के सख़्त रवैये और भारतीय अधिकारियों की मदद से अब ना केवल दिल्ली बल्कि हैदराबाद, मुंबई और चेन्नई जैसे हवाई अड्डों पर भी अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है.
उम्मीद है कि इससे नेपाली लड़कियों का भविष्य ख़राब होने से बचाया जा सकेगा.
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