नरेंद्र मोदी को कज़ाकस्तान से क्या चाहिए?

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- Author, डॉक्टर नजम अब्बास
- पदनाम, मध्य एवं दक्षिण एशिया विशेषज्ञ
भारत की बढ़ती ऊर्जा ज़रूरतों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कज़ाकस्तान दौरा ख़ासा अहम है.
विश्व के 15 प्रतिशत यूरेनियम भंडार कज़ाकस्तान में हैं. ऐसे में, उसके साथ सहयोग परमाणु बिजली उत्पादन में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.
भारत में अभी 21 परमाणु ऊर्जा संयंत्र चल रहे हैं जबकि 6 दूसरे संयंत्र बन रहे हैं.
इसके अलावा कज़ाकस्तान के तेल और गैस के भंडार भी भारत के आर्थिक विकास की ज़रूरतों के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं.
पढ़िए विस्तार से
भारतीय प्रधानमंत्री मोदी एक दिन के दौरे पर कज़ाकस्तान पहुंचे हैं.
इस दौरान वो राष्ट्रपति नूर सुल्तान नज़रबाएफ के साथ सूचना तकनीक, बैंकिंग, व्यापारिक गलियारे बनाने, अधिकारियों को प्रोफेशनल प्रशिक्षण और दवा बनाने के क्षेत्र में द्वीपक्षीय समझौते पर दस्तख़त करेंगे.
मोदी के कज़ाकस्तान दौरे से ठीक दो महीने पहले 7 मई 2015 को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दो दिवसीय दौरे पर कज़ाकस्तान की राजधानी अस्ताना पहुंचे थे.
भारत और कज़ाकस्तान रणनीतिक सहयोग की ओर बढ़ रहे हैं. दोनों देशों के बीच रक्षा और अंतरिक्ष के क्षेत्र में साझीदारी उल्लेखनीय है.
भारत में ऊर्जा की बढ़ती ज़रूरतों को देखते हुए ये दौरा बेहद ख़ास है.
इस समय भारत में 21 परमाणु ऊर्जा प्लांट चल रहे हैं जबकि 6 अन्य प्लांट निर्माणाधीन हैं. इन सब में बिजली पैदा करने के लिए यूरेनियम की जरूरत है.
बिजली की ज़रूरत

इस समय भारत अपने कुल बिजली उत्पादन का मात्र तीन फ़ीसदी (क़रीब 6 हज़ार मेगावाट) परमाणु ऊर्जा से हासिल करता है.
भारत की कोशिश है कि वो अगले 17 सालों में अपनी जरूरत की 20 फ़ीसदी यानी क़रीब 45000 मेगावाट तक बिजली परमाणु ऊर्जा से पा सके.
यह तभी संभव है जब भारत को यूरेनियम की आपूर्ति बिना रोक टोक मिलती रहे. भारत में इसका उत्पादन 350-400 मीट्रिक टन तक है.
अपनी अर्थव्यवस्था के लगातार विस्तार के लिए भारत को ऐसे सहयोगियों की तलाश है जो उसकी यूरेनियम की बढ़ती ज़रूरतों को पूरा कर सकें.
मध्य एशिया के देश कज़ाकस्तान में तेल और गैस के भण्डार हैं. वो यूरेनियम के 15 फ़ीसदी विश्व भंडार का भी मालिक है.
2009 में कज़ाकस्तान यूरेनियम निर्यात करने वाला एक बड़ा देश बन गया.
अब भारतीय विशेषज्ञों ने हेवी वाटर पानी से चलने वाले बिजली घर की स्थापना में सहयोग की पेशकश की है जो दोनों देशों के सहयोग के नए बंधन में पिरो देगा.
यूरेनियम की ज़रूरत

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2008 और 2014 के बीच भारत ने कज़ाकस्तान से 2100 टन यूरेनियम आयात किया.
इसके अलावा भारत ने रूस से 2058 टन और फ्रांस से 300 टन यूरेनियम हासिल किया.
भारत को लंबे समय तक पश्चिमी देशों से यूरेनियम पाने पर प्रतिबंध का सामना करना पड़ा है.
कनाडा ने 1954 में भारत के परमाणु बिजली प्लांट के निर्माण में सहयोग किया था लेकिन 1974 में भारत के पहले परमाणु परीक्षण के बाद उसने यूरेनियम और उपकरण देने पर रोक लगा दी.
अप्रैल, 2015 में कनाडा और भारत सरकार ने संधि की जिसके तहत भारत को अगले पाँच सालों में 3200 टन यूरेनियम 35 करोड़ डॉलर में पर बेचा जाएगा.
भारत की कोशिश है कि अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए उसे यूरेनियम की उचित सप्लाई मिलती रहे ताकि बिजली उत्पादन में कोई रुकावट न आ सके.
हिस्सेदारी और निवेश

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साल 2010-2011 के दौरान भारत में 50 करोड़ टन तेल के बराबर ऊर्जा की ज़रूरत पड़ी.
भारत की ऊर्जा की मांग 2016-17 में 681-738 मिलियन टन तेल के बराबर जा पहुंचेगी जिसमें 70 फ़ीसदी जरूरत आयात से पूरा करनी होगी.
भारत कज़ाकस्तान के ऊर्जा भंडारों में हिस्सेदारी ख़रीदने और निवेश करने की कोशिश कर रहा है.
फ़िलहाल कज़ाकस्तान तेल की गिरती कीमतों के कारण अपने ख़र्चों में कमी की संभावनाओं की समीक्षा कर रहा है. ऐसे में वो भारत के प्रस्तावों में दिलचस्पी दिखा रहा है.

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भारत भी ऊर्जा क्षेत्र में हर मौक़े का खुले दिल से स्वागत करने को तैयार है. भारत कज़ाकस्तान के साथ टेक्नॉलॉजी ट्रांसफ़र से जुड़े समझौते भी करेगा.
भारत ने कज़ाकस्तान की राजधानी में स्थित गेमलेफ यूनिवर्सिटी में एक अध्ययन केन्द्र बनाने की पेशकश की है. इस केंद्र में भारत में तैयार किया गया सुपर कम्प्यूटर लगाया जाएगा.
भारत कज़ाकस्तान में स्थिति आंतरिक्ष के अड्डों का इस्तेमाल करना चाहता है जिसके कारण यह संभव हो सके कि भारतीय अंतरिक्ष मिशन चांद और ग्रहों पर भेजा जा सके.
(ये लेखक के निजी विचार है)
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