ग़ज़ा में इसराइल और फ़लस्तीन ने अपराध किए

ग़ज़ा पर हमले

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संयुक्त राष्ट्र के जाँचकर्ताओं का कहना है कि 2014 के ग़ज़ा संघर्ष के दौरान इसराइल और फ़लस्तीनी लड़ाके दोनों ही युद्ध अपराधों में शामिल हो सकते हैं.

एक बहुप्रतिक्षित रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र की टीम ने कहा है कि उसने दोनों ही पक्षों की ओर से मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के घोर उल्लंघन की ठोस जानकारियां जुटाई हैं.

जाँच आयोग के प्रमुख ने कहा कि ग़ज़ा में अभूतपूर्व तबाही हुई है और यहाँ के लोग भीषण मानवीय पीड़ा से गुज़रे हैं और इससे आने वाली नस्लें भी प्रभावित होंगी.

इसराइल ने इस जांच को राजनीति से प्रेरित बताकर नकार दिया है.

हमास का कहना है कि जाँच में पीड़ित और जल्लाद को ग़लत तरीके से बराबर बताया गया है.

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पिछले साल जुलाई और अगस्त में 50 दिनों तक ग़ज़ा में संघर्ष चला था जिसके बाद दोनों पक्षों में समझौता हो गया था.

इसराइल का कहना है कि उसने ग़ज़ा पर हमला लगातार हो रहे रॉकेट हमलों और सुरंगों के ज़रिए लड़ाकों के हमलों को रोकने के लिए किया था.

संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार परिषद की इस जाँच पर शुरू से ही विवाद होता रहा है.

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इसराइल ने जाँच के साथ सहयोग करने से यह कहते हुए इंकार कर दिया था कि इसके नतीजे पहले से ही तय हैं.

पिछले साल हुए ग़ज़ा संघर्ष के दौरान 2100 फ़लस्तीनी मारे गए थे जिनमें अधिकतर नागरिक थे जबकि 73 इसराइली मारे गए थे जिनमें अधिकतर सैनिक थे.

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