एनजीओ पर पाबंदी पर पाकिस्तान पलटा

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पाकिस्तान सरकार ने देश में मौजूद 'सेव द चिल्ड्रन' संस्था की शाखा को बंद करने के फैसले को वापस ले लिया है.
पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्रालय की तरफ से इस फैसले के बारे में कोई सफाई नहीं दी गई है.
बिना कोई स्पष्ट कारण दिए इस्लामाबाद में पिछले हफ्ते संस्था के दफ्तर को पुलिस ने बंद करवा दिया था.
हालांकि इससे पहले सरकारी अधिकारियों ने सेव द चिल्ड्रन संस्था पर 'सरकार के ख़िलाफ़ गतिविधियों' में शामिल होने का आरोप लगाया था.
सेव द चिल्ड्रन ने रविवार को बीबीसी से कहा कि संस्था सरकार के फैसले का स्वागत करती है.
'विदेशी मदद' है मुद्दा?

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पाकिस्तान ने सेव द चिल्ड्रन पर ओसामा बिन लादेन का पता लगाने के लिए अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए के फ़र्ज़ी टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल होने का आरोप लगाया था.
हालांकि संस्था सीआईए और टीकाकरण का कार्यक्रम चलाने वाले डॉक्टर शकील अफ़रीदी के साथ जुड़े होने से इनकार करती रही है.
पिछले गुरुवार को संस्था का दफ्तर बंद होने पर पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री चौधरी निसार अली खान ने कहा था कि गैर सरकारी संस्थाएं अमरीका, इसरायल और भारत की मदद से अपने दायरे से बढ़कर काम कर रही हैं.
उन्होंने कहा कि स्थानीय गैर सरकारी संस्थाएं जिन्हें विदेश से फंड मिलता है और विदेशी एजेंडे पर पाकिस्तान में काम करती हैं, उन्हें 'डरना चाहिए'.

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करीब 1,200 पाकिस्तानी नागरिक इस संस्था के लिए काम करते हैं. पिछले 18 महीनों से एक भी विदेशी नागरिक इस संस्था के लिए पाकिस्तान में काम नहीं कर रहा है.
अमरीका ने इस मामले में चिंता ज़ाहिर की थी.
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