'लैब में महिलाओं से प्यार हो जाता है'

सर टिम हंट

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इमेज कैप्शन, सर टिम हंट दक्षिण कोरिया में एक कॉफ्रेंस में बोल रहे थे.

नोबल पुरस्कार जीतने वाले एक वैज्ञानिक ने महिलाओं को लेकर की गई टिप्पणी के लिए माफ़ी माँगी है पर साथ में कहा है कि वे ईमानदारी से अपनी बात रख रहे थे.

ख़बरों के मुताबिक़ सर टिम हंट ने दक्षिण कोरिया में एक कॉन्फ़्रेंस में कहा, "मैं आपको बताता हूँ कि महिलाओं के साथ क्या दिक्कत है. जब वे प्रयोगशाला में होती हैं तो तीन बातें होती हैं- आपको उनसे प्यार हो जाता है, उनको आपसे प्यार हो जाता है और जब आप उनकी आलोचना करते हैं तो वो रोने लगती हैं."

उन्हें 2001 में नोबल पुरस्कार मिला था.

बीबीसी से बातचीत में सर टिम हंट कहा कि उन्हें जो लगा उन्होंने कहा है पर साथ ही माफ़ी भी माँगी. उन्होंने कहा कि इतने सारे पत्रकारों के बीच ये बात कहना बेवकूफ़ी थी.

नहीं था मज़ाकिया

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टिम हंट ने कहा कि महिलाओं के साथ काम करने की दिक्कत के बारे में वो अपनी बात पर कायम हैं.

उन्होंने कहा, "ये सच है. मैं प्रयोगशाला में काम करते हुए प्रेम में पड़ चुका है. कुछ दूसरे लोग मुझसे प्यार करने लगे. ये सब विज्ञान के लिए बाधा का काम करता है. प्रयोगशाला में ये बहुत ज़रूरी होता है कि आप समान स्तर पर हों. मुझे खेद है अगर किसी को ठेस पहुँची हो. लेकिन मैं तो ईमानदारी से अपनी बात रख रहा था."

टिम हंट महिलाओं के साथ काम करने की दिक्कत के बारे में अपनी बात पर कायम हैं.

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इमेज कैप्शन, टिम हंट महिलाओं के साथ काम करने की दिक्कत के बारे में अपनी बात पर कायम हैं.

महिलाओं के रोने पर ब्रितानी वैज्ञानिक ने कहा, "ये ज़रूरी है कि आप व्यक्ति की आलोचना न कर उनके विचारों की आलोचना करें. अगर वो रोने लगे तो इसका मतलब है कि आप उनको सही बात बताने से खुद को रोक लेते हो. जबकि विज्ञान का काम सच को तलाशना है."

कॉन्फ़्रेस में हिस्सा लेने आई कॉनी कहती हैं कि टिम हंट ने जो कहा वो कहीं से भी मज़ाकिया नहीं था और उनका मतलब था कि महिलाओं को प्रयोगशाला में अलग कर देना चाहिए.

वहीं यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की डॉक्टर जेनिफ़र रॉन ने कहा, ज़ाहिर है वे मज़ाकिया होने की कोशिश कर रहे थे. वो भी इंसान हैं लेकिन साथ ही रोल मॉडल होने के नाते उनकी कुछ ज़िम्मेदारी भी बनती है.

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