तीन गुना धूम्रपान करते हैं अवसाद के मरीज़

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    • Author, सीमा कोटेचा
    • पदनाम, टुडे प्रोग्राम

मानसिक रूप से बीमार लोग सामान्य लोगों से तीन गुना ज़्यादा धूम्रपान करते हैं, पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड (पीएचई) और नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) के एक सर्वे में ये बात सामने आई है.

विशेषज्ञों के अनुसार सिगरेट पीने से अवसाद और बेचैनी बढ़ सकती है और यह दवाइयों के असर को 50 फ़ीसदी तक कम कर सकती है.

पीएचई का कहना है कि सभी मानसिक स्वास्थ्य अस्पतालों को धूम्रपान-मुक्त क्षेत्र घोषित कर दिया जाना चाहिए.

लेकिन स्मोकर्स (धूम्रपान करने वाले) के अधिकारों के पैरोकार संगठन फॉरेस्ट का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों के मरीज़ों को सिगरेट पीने के लिए आम लोगों जैसी आज़ादी ही मिलनी चाहिए.

'बढ़ता है आत्मविश्वास'

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पीएचई सर्वे के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों के लगभग 64% मरीज़ तंबाकू के आदी हैं जबकि आम लोगों में ये लत सिर्फ 18 फीसदी लोगों को है.

नौ फीसदी मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों को पहले ही धूम्रपान-मुक्त क्षेत्र घोषित किया जा चुका है.

विशेषज्ञों का कहना है कि सिगरेट की लत के कारण मानसिक स्वास्थ्य के मरीज़ों की उम्र आम लोगों की तुलना में 10 से 20 साल कम हो सकती है.

लंदन के मॉड्स्ले अस्पताल की मेट्रन मैरी येट्स कहती हैं कि जो लोग धूम्रपान छोड़ देते हैं, उनके मूड में फर्क आता है, उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और मानसिक तौर पर वे ज़्यादा समर्थ महसूस करते हैं.

लेकिन मानसिक रूप से बीमार रहे गैरी नेवन ने कहा, "हम अस्पताल बेहतर महसूस करने के लिए जाते हैं, और कभी-कभी सिगरेट पीने से अच्छा महसूस होता है."

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"मुझे ये अच्छा नहीं लगेगा कि मुझे कहा जाए कि मैं सिगरेट नहीं पी सकता जबकि घर पर तो मैं सिगरेट पी ही सकता हूं. हम बच्चे नहीं हैं."

स्मोकर्स ग्रुप, फॉरेस्ट के निदेशक साइमन क्लार्क ने पीएचई के इस सुझाव की निंदा की कि सभी मानसिक स्वास्थ्य के अस्पतालों को धूम्रपान मुक्त क्षेत्र घोषित कर दिया जाए.

उन्होंने कहा, "धूम्रपान महज़ सेहत से जुड़ा सवाल नहीं है, हालांकि बहुत से सिगरेट पाने वाले यह मानते हैं कि इससे चिंता और तनाव कम होता है. अगर कुछ मानसिक रूप से बीमार लोगों को सिगरेट पीना अच्छा लगता है तो उन्हें इस सुख से महरूम क्यों रखा जाए?"

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