'जिसको सिगरेट पीनी है, वो पिएगा ही'

सिगरेट पीती एक महिला.

इमेज स्रोत, Reuters

    • Author, शालू यादव
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

इस साल एक अप्रैल से तंबाकू उत्पादों के पैकेटों पर लगी चेतावनी भरी तस्वीर का साइज़ बड़ा किया जाना था.

लेकिन इस मामले पर विचार-विमर्श के लिए बनी संसदीय समिति ने कहा कि उन्हें इस पर विचार के लिए अभी और समय चाहिए.

इसके बाद शुरू हुआ कुछ भाजपा सदस्यों की बयानबाज़ी का सिलसिला. समिति के प्रमुख दिलीप गांधी ने कहा कि तंबाकू खाने से कैंसर नहीं होता. समिति के दो अन्य सदस्यों ने उनके इस बयान का समर्थन किया.

आइए जानते हैं कि दुनिया में तंबाकू सेवन को रोकने की कोशिशों कहाँ और कब-कब हुई.

मालबोरो मैन नाम के विज्ञापन में देखे गए सेलेब्रिटी एरिक लॉसन की मौत फेफड़ों की बीमारी से हुई थी

इमेज स्रोत, BBC World Service

इमेज कैप्शन, मालबोरो मैन नाम के विज्ञापन में देखे गए सेलेब्रिटी एरिक लॉसन की मौत फेफड़ों की बीमारी से हुई थी

एक ज़माना था जब सिगरेट पीना फ़ैशन स्टेटमेंट माना जाता था. 1950 के दशक में अमरीका में हॉलीवुड में धूम्रपान के चलन और 'मालबोरो मैन' विज्ञापनों को लेकर लोगों में बहुत जुनून था.

मालबोरो एक अमरीकी सिगरेट ब्रैंड है. माना जाता है कि दुनिया में सबसे ज़्यादा सिगरटें इसी ब्रैंड की बिकती हैं.

इस कंपनी ने अपने तम्बाकू उत्पाद बेचने के लिए एक विज्ञापन अभियान चलाया. इसमें सिगरेट के डिब्बे पर एक आकर्षक नौजवान को सिगरेट पीते हुए दिखाया गया था.

लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इस विज्ञापन मुहिम में धूम्रपान का शौक रखने वाली जिन जानी-मानी हस्तियों ने हिस्सा लिया उनमें से पांच की मौत फेफड़े से जुड़ी बीमारी की वजह से हुई.

शुरुआत में दुनिया भर में मुख्य तौर पर पुरुष ही धूम्रपान करते थे, लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के बाद धूम्रपान करने वाली महिलाओं की तादाद भी बढ़ने लगी.

ये वो ज़माना था जब दफ़्तरों या रेस्त्रा के भीतर भी लोग खुल कर धूम्रपान करते थे.

'धूम्रपान का फ़ैशन' बदला

दूसरे विश्व युद्ध के बाद धूम्रपान करने वाली महिलाओं की तादाद बढ़ गई थी.

इमेज स्रोत, Press Association

इमेज कैप्शन, दूसरे विश्व युद्ध के बाद धूम्रपान करने वाली महिलाओं की तादाद बढ़ गई थी.

धूम्रपान की छवि तब बदलनी शुरू हुई जब उससे होने वाले ख़तरे की असल तस्वीर सामने आई.

ब्रितानी मेडिकल रिसर्च काउंसिल ने साल 1957 में एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें फेफड़ों के कैंसर का सीधा संबंध धूम्रपान से पाया गया. इसके बाद 1962 में रॉयल कॉलेज ऑफ़ फ़िज़ीशियन्स की रिपोर्ट में भी यही निष्कर्ष पाया गया.

बस फिर क्या था दुनिया भर की सरकारों ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया.

भारत में हर साल करीब नौ लाख लोगों की मौत तंबाकू की वजह से होती है
इमेज कैप्शन, भारत में हर साल करीब नौ लाख लोगों की मौत तंबाकू की वजह से होती है

1965 में ब्रिटेन ने सिगरेट के विज्ञापनों को बैन कर दिया. जबकि सभी तम्बाकू उत्पादों के विज्ञापनों पर 2005 में प्रतिबंध लगाया गया.

इसी के साथ यूरोपीय संघ ने भी तम्बाकू से जुड़े सभी विज्ञापनों और तंम्बाकू कंपनियों की ओर से किसी आयोजन को प्रायोजित करने पर रोक लगा दी.

ऑस्ट्रेलिया में एक बड़ी बहस के बाद 2012 से सभी ब्रैंड के सिगरेट पैकेटों पर भूरे रंग का कवर चढ़ा कर उस पर टार से भरे फेफड़ों की तस्वीर, सड़ते हुए पीले दांत और गुलाबी रंग के ट्यूमरों की तस्वीर लगाना अनिवार्य कर दिया गया.

भारत की कोशिशें

भारत में 11 करोड़ लोग तंबाकू और सिगरेट का सेवन करते हैं.

इमेज स्रोत, PA

इमेज कैप्शन, भारत में 11 करोड़ लोग तंबाकू और सिगरेट का सेवन करते हैं.

जहां तक भारत की बात है तो यहां करीब 11 करोड़ लोग सिगरेट या तंबाकू से बने दूसरे उत्पादों का सेवन करते हैं.

इस बढ़ती तादाद पर रोक लगाने के लिए भारत सरकार ने विभिन्न संस्थाओं के साथ मिल कर पिछले कुछ दशकों में कई अभियान चलाए.

एक राष्ट्रीय तंबाकू निरोधक कानून भी बनाया गया. इसके तहत साल 2003 में तंबाकू के विज्ञापनों पर रोक लगा दी गई.

इसके बाद 2008 में राष्ट्रव्यापी क़ानून लाया गया जिसके जरिए सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर रोक लगा दी गई.

यहां तक कि फ़िल्मों में स्क्रीन पर तंबाकू या सिगरेट दिखाए जाते समय एक स्वास्थ्य चेतावनी देना अनिवार्य कर दिया गया.

इसके बाद 2009 में तंबाकू उत्पाद के पैकेट पर चेतावनी भरी तस्वीर का होना अनिवार्य बनाया गया.

सिगरेट बेचने वालों का कहना है कि पैकेटों पर बनी चेतावनी का ग्राहकों पर कोई फ़र्क नहीं पड़ता
इमेज कैप्शन, सिगरेट बेचने वालों का कहना है कि पैकेटों पर बनी चेतावनी का ग्राहकों पर कोई फ़र्क नहीं पड़ता

क्या तस्वीर दिल बदल देगी?

लेकिन सवाल यह है कि सिगरेट के पैकेट पर बनी चेतावनी का धूम्रपान करने वालों पर कोई असर पड़ता है?

दिल्ली की एक पान की दुकान पर सिगरेट ख़रीदने वाले ग्राहकों से मैंने यही सवाल किया, तो सबका जवाब एक सा ही था.

एक ग्राहक ने कहा, ''मैं 25 साल से सिगरेट पी रहा हूं और हर रोज़ एक डिब्बी सिगरटें पीता हूं. मुझे कभी पैकेटों पर लगी चेतावनियों ने सोचने पर मजबूर नहीं किया. जिसको सिगरेट पीनी है, वो तो पिएगा ही. धूम्रपान करने वाले लोग बस सिगरेट का डब्बा उठाते हैं, अपनी सिगरेट निकालते हैं और नशा करते हैं. हमारा तो ध्यान तक नहीं जाता इन चेतावनियों पर.'

शायद यही कारण है कि भारत में सिगरेट पैकेटों पर चेतावनी की तस्वीर का साइज़ 40 फीसदी से बढ़ा कर 85 फीसदी करने की मांग की जा रही है.

दुनिया भर में किए गए शोध में ये कहा गया है विभत्स तस्वीरों को देखने के बाद लोगों के बीच धूम्रपान करने की ललक कम हुई है.

ऑस्ट्रेलिया में हर सिगरेट पैक पर चेतावनी भरी वीभत्स तस्वीरें लगाई गई हैं

इमेज स्रोत, Getty

इमेज कैप्शन, ऑस्ट्रेलिया में हर सिगरेट पैक पर चेतावनी भरी वीभत्स तस्वीरें लगाई गई हैं

कनाडा में हुए एक सर्वेक्षण के मुताबिक़ इन कदमों से साल 2000 से 2009 के बीच धूम्रपान का अनुपात 12 से 20 फीसद तक गिर गया था.

सिगरेट

इमेज स्रोत, AFP

इमेज कैप्शन, भारत में अभी सिगरेट के पैकेट के 40 फ़ीसदी हिस्से पर चेतावनी दी जाती है.

वर्ल्ड लंग फ़ाउंडेशन की भारत निदेशक डॉक्टर नंदिता मुरुकुटला ने बीबीसी से बातचीत में बताया, ''भारत में किए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक़ अगर सिगरेट और तंबाकू के पैकेटों पर चेतावनी भरी तस्वीर का साइज़ 40 फीसदी से बढ़ा कर 85 फीसदी कर दिया जाए और धूम्रपान का परिणाम दर्शाने वाली और वीभत्स तस्वीरें लगाई जाएं, तो ज़्यादातर लोग इसे खरीदते हुए इस बात पर ग़ौर करेंगें जिससे कि धीरे-धीरे तंबाकू उत्पाद के सेवन में गिरावट आने की संभावना है.''

ख़ैर संसदीय समिति इस फ़ैसले को लागू करने से भले ही कतरा रही हो, लेकिन इस पूरे विवाद में शायद एक सकारात्मक पहलू छिपा हो. वो यह कि आम जनता के बीच कम से कम तंबाकू से होने वाले नुक़सान के बारे में एक नई बहस ज़रूर शुरू हो गई है.

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक कर सकते हैं</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link>. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>