नेपाल: अपना घर खड़ा रहा, पड़ोसी का आ गिरा

- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, काठमांडू से लौटकर
राम प्रसाद माहतो ने एक बड़े बिल्डर के ज़रिए अपना चार मंज़िला मकान बड़े शौक से बनवाया था.
मकान में एक मज़बूत बेसमेंट था जिसे भूकंपरोधी बताया गया था और उसके ऊपर बने थे तीन आलीशान फ्लैट्स.
काठमांडू बस अड्डे से सिर्फ दस मिनट की दूरी पर स्थित इस घर ने तो 25 अप्रैल का भूकंप झेल लिया लेकिन पड़ोस की इमारत इसी पर आ गिरी.
बगल वाली तीन मंज़िला इमारत में एक कोचिंग सेंटर चलता था और कुछ दफ्तर थे. लेकिन अब सब कुछ टेढ़ा होकर माहतो के घर पर टिका हुआ है.
सामने चाय की दुकान चलाने वाले राम थापा ने बताया, "हादसे में एक व्यक्ति की मौत हुई लेकिन अगल बगल के चार घर खाली करा दिए गए हैं क्योंकि कभी भी धराशाई हो सकते हैं".
तबाही

पिछले तीन हफ़्तों के दौरान नेपाल में विनाशकारी भूकंप के झटकों ने जान-माल का भारी नुक़सान किया है.
आठ हज़ार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों अब भी लापता हैं.
लोग आज भी आसमान के नीचे सो रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार पूरे देश में क़रीब 5,00,000 घरों को नुक़सान पहुंचा है.
कमज़ोर इमारतें
नेपाल सरकार के सामने अब बड़ी चिंता यह है कि अनाप-शनाप तरीके से पास होने वाले घरों के नक्शों पर नकेल कैसे कसी जाए और दोबारा पुनर्निर्माण का काम शुरू किया जाए.
क्योंकि राजधानी काठमांडू में ही ऐसे सैकड़ों मकान हैं जिन्हें भूकंप ने तो क्षति नहीं पहुंचाई लेकिन अगल-बगल की कमज़ोर और लचर इमारतों के चलते उनके निवासियों को अपने घर छोड़ने पड़े.

चाहे हनुमाना ढोका मोहल्ला हो या फिर धापासी और नया बाज़ार ही क्यों न हो, लगभग हर इलाके में आप को दर्जन भर इमारतें एक दूसरे पर टिकी नज़र आएंगी.
ऐसा ही कुछ हाल काठमांडू के बाहर के ज़िलों का भी है.
सिन्धुपाल चौक के चौतारा शहर में मातम का माहौल है क्योंकि यहां सैंकड़ों लोगों की जानें गई हैं.
इससे भी भयावह ये है कि यहां के 90% निवासी अपने घरों के बाहर सो रहे हैं. क्योंकि जिनके घर बच भी गए उनके ऊपर बगल की इमारत आ गिरी.
नतीजन अब ऐसी दर्जनों भर इमारतों को ढहाया जाएगा जिनमें हालात रहने लायक नहीं हो.
बेहिसाब निर्माण
जानकारों के अनुसार समय-समय पर मिलने वाली भूकंप की चेतावनियों के बावजूद नेपाल के बड़े शहरों- खासतौर से काठमांडू, में ज़मीन का दाम आसमान छू रहा था क्योंकि बिल्डर एक छोटे प्लॉट पर भी आठ से बारह फ़्लैट निकाल कर उसे बेचते रहे हैं.

भूकंप के बाद से प्रशासन ने कम से कम दो हज़ार ऐसी इमारतों पर निशान भी लगा दिए हैं जिन्हें गिरा कर दोबारा बनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.
हालांकि ये काम कब तक पूरा होगा इस पर कोई भी बयान नहीं आया है.
नेपाल योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष शंकर शर्मा के अनुसार रफ़्तार से दौड़ने वाली हर चीज़ पर ब्रेक तो लगना ही होता है.
उन्होंने कहा, "शहरीकरण एक बेहतरीन चीज़ है लेकिन नियमों को ध्यान में रखते हुए. आज काठमांडू में आलम ये है कि मुझे सिर्फ अपने घर की ही नहीं अपने पड़ोसी के घर की मज़बूती की भी चिंता है क्योंकि कल को कुछ भी हो सकता है"
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