काबुल की 'स्केटिंग गर्ल्स'

इमेज स्रोत, Jessica FulfordDobson
- Author, फ़ियोना मैकडोनाल्ड
- पदनाम, बीबीसी कल्चर
ब्रितानी फ़ोटोग्राफ़र जेसिका फ़ुलफ़र्ड डॉबसन पहली बार जून, 2013 में काबुल पहुंची. तब वहां की फिज़ाओं में उन्हें दो चीजों का एहसास हुआ- हवा में गुलाब की सुगंध और तारकोल की गंध, क्योंकि काबुल में बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण चल रहा था.
जेसिका काबुल ख़ास सीरीज़ को पूरा करने के इरादे से गई थीं. वे अफ़गानिस्तान में समाज की वो तस्वीर देखने गई थी जो उस समाज के बारे में बनी धारणाओं को चुनौती देती हैं.
उन्होंने उन लड़कियों के पोर्ट्रेट तैयार किए जिनकी पर्सनैलिटी स्केटबोर्ड को इस्तेमाल कर निखर रही है. स्केटबोर्ड - उस देश में, जहां महिलाओं और लड़कियों को बाइक चलाने की इज़ाजत नहीं है. स्केटिंग ने इनके जीवन में नया उत्साह भर दिया है.

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अपनी नई किताब में फ़ुलफ़र्ड डॉबसन ने लिखा है, "जब आप इन ख़ूबसूरत लड़कियों को मैले कुचैले कपड़ों में स्केट पार्क में बात करते देखते हैं, हंसते खिलखिलाते देखते हैं तो आपको मालूम होता है कि स्केटिंग से इनके जीवन में क्या बदलाव आया है. दुनिया भर में कहीं भी, जब आप लड़कियों को उनकी पसंद की चीजों को करने का मौका देते हैं तो उनका व्यक्तित्व निखरता है. "

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दरअसल इस बदलाव की कहानी 2007 में शुरू हुई, जब अफ़गान चैरिटी संस्था स्केटिस्तान ने ज़मीनी स्तर पर बच्चों को स्केटिंग सिखाना शुरू किया था. मौजूदा समय में संस्था 1200 से ज्यादा बच्चों को स्केटिंग सीखा रही है.
फ़ुलफ़र्ड डॉबसन ने इन बच्चों में शामिल लड़कियों के बारे में लिखा है, "इनके चेहरे की खुशी को आप नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते."

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"स्केटबोर्ड चलाना काफी कठिन है और इन लड़कियों की कोमलता को देखते हुए आपको ये एहसास हो जाएगा कि इनमें कितने ग़ज़ब का साहस है. ये गिरकर उठना, संभलना, दोबारा कोशिश करना, सब जानती हैं. ये अफ़ग़ानिस्तान की युवा महिलाओं की ताक़त, उत्साह और पॉजिटिविटी की अदभुत मिसाल है."
फ़ुलफ़र्ड डॉबसन ने इन लड़कियों के साथ कुछ सप्ताह बिताए. वे कहती हैं, "मैंने उनके साथ कुछ सप्ताह बिताए और इस दौरान वो भूल गईं कि मैं कुछ ही समय से फिर सालों से उनके साथ हूँ."

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ये तस्वीर 2014 के टेलर वेसिंग फोटोग्राफ़िक पोर्ट्रेट प्राइज़ में दूसरे स्थान पर रही थी. इस फ़ोटोग्राफ़ी प्रतियोगिता का आयोजन लंदन के नेशनल पोर्ट्रेट गैलरी की ओर से किया गया था.
इस तस्वीर के बारे में फ़ुलफ़र्ड डॉबसन कहती हैं, " मैंने सात साल की इस बच्ची की नौ तस्वीरें लीं. ये आख़िरी तस्वीर थी जब वो स्कूल बस पकड़ने के लिए भाग रही थी. वो देखने में भले शांत लग रही हों लेकिन बहुत जल्दी में है. मुझे इस तस्वीर में जो सबसे ज्यादा पसंद है वो उसका सहजता से स्केट पर हाथ रखना है."

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डॉबसन ने स्केटिंग करने वाली लड़कियों पर काम ज़रूर किया है, लेकिन उनकी कई तस्वीरों में एक्शन नहीं दिखता. अब इस तस्वीर के बारे में डॉबसन कहती हैं, "इसने जिस अंदाज़ में कपड़े पहने हैं, वह आकर्षित करने वाला है. सिर पर स्कार्फ़ से लेकर उसके चेहरे की आभा तक, सब पर नजरें ठहर जाती हैं."

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डॉबसन ये भी दावा करती हैं कि इन लड़कियों ने अपनी पसंद से कपड़े पहने और अपने ही स्टाइल से तस्वीरें खिंचवाईं.

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डॉबसन को कई बार ये तस्वीरें पर्याप्त रोशनी के अभाव में लेनी पड़ीं लेकिन इससे तस्वीरों या सब्जेक्ट की एनर्जी पर कोई ख़ास असर नहीं पड़ा.
स्केटिस्तान अभावों के साथ जीते परिवारों के बच्चों को स्कूल से जोड़ने का काम भी करता है. इनमें से ज्यादातर बच्चें गली मुहल्ले में काम करने वाले हैं.

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डॉबसन ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस से कहा, "ये बच्चे भी दुनिया के दूसरे बच्चों की तरह बस मज़ा करना चाहते हैं."
<italic><bold>अंग्रेज़ी में <link type="page"><caption> मूल लेख</caption><url href="http://www.bbc.com/culture/story/20150501-the-skate-girls-of-kabul" platform="highweb"/></link> यहां पढ़ें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी कल्चर</caption><url href="http://www.bbc.com/culture" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.</bold></italic>
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