'इस्लामी राज पाक में ही नहीं, दुनिया में'

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- Author, टॉम ब्रुक
- पदनाम, बीबीसी कल्चर
न्यूयार्क में चल रहे ट्राइबेका फिल्म फेस्टिवल में पाकिस्तान की लाल मस्जिद को दिखाने वाली डॉक्यूमेंट्री काफ़ी हिट साबित हुई है.
'अमंग द बिलीवर्स' नाम की डॉक्यूमेंट्री में लाल मस्जिद में चल रही गतिविधियों और मस्जिद के मौलाना अज़ीज़ को चित्रित किया गया है.
मौलाना अज़ीज एक मंच से भाषण देते हुए कहते हैं - 'मुझे पूरा यक़ीन है कि इस्लामी राज सिर्फ पाकिस्तान में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में छा जाएगा....यदि तुम सोचते हो कि तुम हमें बदल दोगे, तो भूल जाओ.'
जुलाई 2007 में इस्लामाबाद की लाल मस्जिद में उग्र कट्टरपंथियों और पाकिस्तान सेना की बीच एक हफ़्ते की घेराबंदी के बाद भीषण संघर्ष हुआ था जिसमें ख़ासी गोलाबारी हुई थी.
अंत में 90 से ज़्यादा चरमपंथी और कम से कम 10 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे.
चार साल का जिहादी?

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लाल मस्जिद में युवाओं के साथ कुछ बच्चे भी मौलाना अज़ीज़ से तालीम लेते दिखाए गए हैं.
इस डॉक्यूमेंट्री के ज़रिए निर्देशक हिमाल त्रिवेदी और मोहम्मद अली नक़वी ने दिखाया है कि किस तरह से ये पाकिस्तानी मौलवी मस्जिदों में युवाओं और चार साल के बच्चों तक को भी इस्लाम और जिहाद की तालीम दे रहे हैं.
फ़िल्म की शुरुआत एक चार साल के बच्चे के कटुता भरे भाषण से होती है.
एक सीन में चार साल का बच्चा भरपूर ग़ुस्से से बोलता है - "लाल मस्जिद की क़ुर्बानी देखिए....यदि आप यहाँ दाख़िल होने की हिमाकत करोगे, तो हम जिहाद करेंगे."
'हमारा रास्ता - जिहाद'

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इस डॉक्यूमेंट्री में बड़ी संख्या में पाकिस्तान के युवा दिखाए गए हैं जो इस्लाम और जिहाद को लेकर नारे लगा रहे हैं.
डॉक्यूमेंट्री के कुछ सीन्स में इस तरह चौंकाने वाले सवाल-जवाब और नारे हैं- 'क्या तुम इस्लाम के लिए अपनी जान कुर्बान करोगे?'
एकत्र हुए युवा और मासूम ऊँची आवाज़ में जवाब देते हैं - 'इंशा अल्लाह.'
'क्या तुम इस्लाम के लिए जेल जाओगे?'
'इंशा अल्लाह'
'हमारा रास्ता - जिहाद'
'चिंतित करने, डराने वाली'

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<link type="page"><caption> बीबीसी कल्चर</caption><url href="http://www.bbc.com/culture" platform="highweb"/></link> के फिल्म क्रिटिक ओवेन ग्लिबरमैनने ने इस डॉक्यूमेंट्री के बारे में कहा, "मेरे लिए तो ये डॉक्यूमेंट्री चिंतित करने वाली है लेकिन इसमें चौंकाने वाली अच्छी ख़ासी जानकारी भी मिलती है. इस मदरसे से मौलवी अज़ीज़ छात्रों को शिक्षा देते हैं और वे अन्य मस्जिदों-मदरसों में जाकर भी इस्लाम की तालीम देते हैं."
ओवेन ग्लिबरमैन कहते हैं, "इसमें तालीम ले रहे बच्चे पूरे दिन क़ुरान की आयतों को याद करते हैं."
स्लेट पत्रिका की कल्चर राइटर आएशा हैरिस कहती हैं, "यह डॉक्यूमेंट्री एक तरह से डराने वाली है. हालांकि इससे कई जानकारियां भी मिलती हैं."
<italic><bold>अंग्रेज़ी में <link type="page"><caption> मूल लेख</caption><url href="http://www.bbc.com/culture/story/20150420-face-to-face-with-a-boy-jihadist" platform="highweb"/></link> यहां पढ़ें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी कल्चर</caption><url href="http://www.bbc.com/culture" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.</bold></italic>
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