सबसे पहली घड़ी किस महिला ने पहनी?

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    • Author, फियोना मैक्डोनॉल्ड
    • पदनाम, बीबीसी कल्चर

मोबाइल फ़ोन और लैपटॉप की दुनिया में अपनी लुक, डिज़ाइन और परफ़ॉर्मेंस की वजह से तहलका मचाने वाली एप्पल कंपनी ने हाल ही में अपनी स्मार्ट वॉच को लाँच किया है.

इसके बारे में कंपनी के सीईओ टिम कुक ने कहा, "लोग घड़ी से क्या चाहते हैं, इसे हम नए सिरे से परिभाषित कर देंगे."

घड़ियों की दुनिया पर नजर रखने वाली वेबसाइट हूडिनकी के संपादक बेंजामिन क्लाइमर ने एप्पल स्मार्टवॉच के बारे में कहा, "कलाई की घड़ियों में ही नहीं, वियरेबल टेक्नालॉजी की दुनिया में एप्पल वॉच टर्निंग प्वाइंट हो सकती है."

क्लाइमर आगे कहते हैं, "वियरेबल टेक्नालॉजी के लोगों को ये पसंद आ सकती है. गूगल ग्लास अपने मकसद को पूरा नहीं कर पा रहा था. उसका डिज़ाइन भी अच्छा नहीं था. ऐसे में एप्पल वॉच में उन कमियों को पूरा करने की संभावना है."

स्मार्ट वॉच के बाज़ार में हलचल

सबसे अहम बात यही है कि एप्पल वॉच घड़ी ही है. हालांकि इसकी तुलना 50 हज़ार डॉलर कीमत वाली घड़ियों से नहीं हो सकती लेकिन क्लाइमर के मुताबिक क्वार्ट्ज़ और लोअर इंड के बाज़ार को ये घड़ी प्रभावित कर सकती है.

वहीं 1001 रिस्ट वॉचेज के संपादक मार्टिन हॉसरमान कहते हैं, "एप्पल वॉच से घड़ियों के लग्ज़री बाज़ार को कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन ये घड़ियों के बाज़ार पर असर तो डालेगी."

कुछ लोगों की उम्मीद कहीं ज्यादा है. इंटरनेशनल म्यूज़ियम ऑफ़ होरोलॉजी के चीफ़ क्यूरेटर रेगिस हुगुनेन ने कहा, "ये घड़ी स्विस वॉच इंडस्ट्री को हिलाने का दम रखती है."

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क्या इस तरह की चर्चा किसी घड़ी को लेकर पहले भी हुई है? बीबीसी कल्चर आपको पिछले दशकों की उन घड़ियों के बारे बताएगा जिन्हें बाज़ार में आते ही टर्निंग प्वाइंट माना गया.

इनमें से कुछ घड़ियों का विज्ञापन एकटर-एक्ट्रेस, जानी-मानी हस्तियों, पर्वातारोहियों, समुद्री गोताखोरों और अंतरिक्ष यात्रियों तक ने किया था.

पहले औरतों ने ही रिस्ट वॉच पहनी

गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स के मुताबिक पहली रिस्ट वॉच का डिज़ाइन पाटेक फिलिप ने 1868 में हंगरी की राजकुमारी कोस्कोविक्ज के लिए तैयार किया था.

दशकों तक घड़ियां केवल महिलाएं ही पहना करती थीं. पुरुषों में घड़ी पहनने का चलन प्रथम विश्वयुद्ध के बाद शुरू हुआ.

मार्टिन हॉसरमान कहते हैं, "पायलटों को नेविगेशन जानने के लिए कलाई पर घड़ी पहनने की जरूरत थी और प्रथम विश्व युद्ध से पहले ही पायलट वॉच का अस्तित्व था."

हॉसरमान के मुताबिक "लुई कार्टिये ने पॉकेट वॉच को अपने एक पायलट दोस्त के लिए रिस्ट वॉच में तब्दील कर दिया था." ये 1904 में बनी और वर्ष 1911 में बाज़ार में आई.

ये दोस्त थे ब्राजीली एविएशन पॉयनियर अलर्बेटो सैंटोस डूमाँट. हॉसरमान के मुताबिक कार्टिये की घड़ी इतनी बड़ी थी कि उसमें आसानी से समय नज़र आता था.

पहली कार्मिशयल वॉच

कार्टिये की टैंक वॉच (1919) सबसे प्रतिष्ठित कलाई घड़ियों में शुमार है. इसे ग्रेटा गारबो, कैरी ग्रांट, प्रिसेंस डायना, जैकलीन कैनेडी, ग्रास कैली और एंडी वारहोल पहना करते थे.

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इसके निर्माता का दावा था कि ये घड़ी टैंक से प्रभावित होकर बनाई गई है. यह पहली कलाई घड़ी थी जो पॉकेट वॉच नहीं थी.

न्यूयार्क के मशहूर स्टोर क्रिस्टी के वॉच डिपार्टमेंट के प्रमुख सैम हिंस ने वैनिटी फ़ैयर को 2009 में दिए इंटरव्यू में कहा था, "घड़ी निर्माताओं को अमूमन स्टाइल की चिंता नहीं होती. हालांकि आपको कई ख़ूबसूरत डिज़ाइन के पॉकेट वॉच मिलते हैं लेकिन वे पॉकेट में रखे जाते थे. कार्टिये ज्विलरी बनाने का ब्रांड था इसलिए उसने डिज़ाइन का भी ख्याल रखा."

पहली वॉटर प्रूफ घड़ी

औयस्टर पहली वाटरप्रूफ घड़ी थी. इसे पहली बार 24 साल के मर्सिडीज ग्लीट्ज़ ने 1927 में पहना था.

उन्होंने इसे पहनकर 10 घंटे में इंग्लिश चैनल को तैरकर पार करने का करिश्मा किया. ये घड़ी 10 घंटे पानी में डूबे रहने के बाद भी एकदम ठीक काम कर रही थी.

ग्लीट्ज़ ने रोलेक्स को लिखा था, "आपको ये जानकर प्रसन्नता होगी कि रोलेक्स औयस्टर चैनल पार करने के दौरान भी विश्वसनीय ढंग से सटीकता के साथ समय बताती रही."

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औयस्टर सबमेरिनर घड़ी से पहले का प्रारूप था. सबमरिनर भी क्लासिक घड़ी थी, जिसे वामपंथी क्रांतिकारी चे ग्वारा और फ़िल्मों में जेम्स बांड के तौर पर शौन कॉनेरी ने पहना था.

रेगिस हुगुनेन के मुताबिक 1960 में एक खास रोलेक्स औयस्टर को अगस्ता पिकार्ड के साथ मारिना ट्रेंच में 10,916 मीटर तक डूबाया गया लेकिन घड़ी को कुछ नहीं हुआ.

पहली स्पोर्ट्स वॉच

रिवर्सेबिल केस और स्लाइड एंड फ्लिप मैकेनिज्म वाली रिवर्सो पहली ऐसी स्पोर्ट्स वॉच (1931) जिसे ख़ास तौर पर स्पोर्ट्स को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया था.

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हॉसरमान के मुताबिक, "इसे पोलो खिलाड़ी पहना करते थे. इसका ग्लास नहीं टूटे इसके लिए इसमें स्टील की बैकसाइड लगी हुई थी."

फ़ैशन की दुनिया बदलने वाली घड़ी

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हॉसरमान के मुताबिक लूमिनर इतालवी नौ सेना के गोताखोरों के लिए (1950 में) बनाई गई थी. लेकिन बाद में ये आम लोगों में लोकप्रिया हुई.

तब पुरुषों की घड़ी अमूमन 27-28 मिलीमीटर डायमीटर की होती थी, तब इसका डायमीटर 45 मिलीमीटर रखा गया था. ये बाद में महिलाओं में भी खूब लोकप्रिय हुई.

वो घड़ी जो चांद पर गई

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ओमेगा स्पीडमास्टर (1957 में) अंतरिक्ष जाने वाली पहली घड़ी थी. अपोलो मिशन के नील ऑमस्ट्रांग ने लूनार मॉड्यूल से निकलते वक्त स्पीडमास्टर को उतार दिया था लेकिन बज़ एल्ड्रिन ने घड़ी पहनकर ही चंद्रमा की सतह पर कदम रखा.

एल्ड्रिन ने अपने मेमॉयर रिटर्न टू अर्थ में लिखा, "चंद्रमा की सतह पर चलते हुए ह्यूस्टन में क्या समय होगा, ये जानना ज़रूरी नहीं होता. लेकिन मैं घड़ियों का शौकीन हूँ और मैने स्पीडमास्टर को दाईं कलाई पर स्पेसस्यूट के ऊपर बांध लिया."

नासा ने इसे अंतरिक्ष में भेजने से पहले कई पहलुओं में जांचा परखा था. इसको माइनस 160 डिग्री से लेकर 120 डिग्री सेल्सियस के बीच परखा गया. अंतरिक्ष यात्री इसे आज भी मिशन के दौरान पहनते हैं. आज भी इसे अपोलो 13 के एस्ट्रोनॉट्स को बचाने का श्रेय दिया जाता है.

स्टील की पहली घड़ी

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हॉसरमान के मुताबिक स्टील की पहली लग्ज़री घडियों के डिज़ाइनर थे जेराल्ड जेंटा. ये घड़ियां थीं - पाटेक फिलिप नाटिलस, रॉयल ओक और आईडब्ल्यूसी इंजेन्योर.

ये तीनों घड़ियां एक दूसरे की भाई-बहन जैसी लगती हैं और इन्होंने आधुनिक रिस्ट वॉच के लग्ज़री बाज़ार में स्टील को जगह दी.

इससे पहले केवल गोल्ड से लग्ज़री वॉच बनती थीं. लेकिन ये घड़ियां सोने की घड़ियों के मुकाबले सस्ती नहीं थीं.

स्मार्ट वॉच के कॉन्सेप्ट की शुरुआत

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1977 में जब एचपी-01 घड़ी लाँच की गई तब ह्यूवेट पैकर्ड ने डींग मारी, "आप इस पर टाइम देखने के साथ-साथ कई कुछ कर सकते हैं - लंबे फ़ोनकाल की कीमत कैलकुलेट करना, अगर पायलट हैं तो अगले चेक प्वाइंट तक की दूरी चेक करना."

रेगिस हुगुनेन ने बताया, " ये पहली घड़ी थी, जिसमें एलईडी डिस्पले था, रिस्ट वॉच थी और कैलकुलेटर भी था. ये एक तरह से स्मार्टवॉच की जनक थी."

क्लाइमर सीको और कैसियो-जी-शॉक का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि स्मार्टवॉच यानी मल्टी फंक्शनल डिजिटल वॉच तो 1970 के दशक से भी बाज़ार में हैं."

नई स्विस वॉच - स्वॉच

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हुगुनेन के मुताबिक स्वॉच स्विस वॉच की दुनिया में नए कंसेप्ट की तरह था. इसे 1983 में स्विटजरलैंड के वॉच मार्केट के संकट को दूर करने के लिए बनाया गया था.

क्लाइमर कहते हैं कि स्वॉच घड़ियों ने स्विस घड़ी उद्योग को नया जीवन दिया था. लेकिन एप्पल वॉच से इन्हें चुनौती मिल सकती है.

क्लाइमर कहते हैं, "स्वॉच ने घड़ियों को कूल, चीप और फ़न बना दिया. घड़ियं का महंगा न होना अहम बात है. पिछले तीस सालों की सबसे अहम घड़ी है स्वॉच."

स्वॉच एप्पल की चुनौती का सामना करने को तैयार है. कंपनी के सीईओ निक हायेक कहते हैं, "हमारी स्मार्ट वॉच सबसे ख़ूबसूरत होगी. और फिर उसे हर रोज़ या हर महीने चार्ज करने की ज़रूरत नहीं होनी चाहिए...."

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