श्रीलंका में राष्ट्रपति के अधिकारों में कटौती

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श्रीलंका की संसद ने राष्ट्रपति की शक्तियों को कम करने और राष्ट्रपति के कार्यकाल को दो बार तक सीमित करने से जुड़ा एक अहम संशोधन पारित किया है.

मौजूदा राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरीसेना ने चुनाव के दौरान इस संशोधन को लागू करने का वादा किया था.

पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने सत्ता में रहते हुए अपनी शक्तियों में काफ़ी इजाफा कर लिया था. उन्हें जनवरी में हुए चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था.

उनके बाद मैत्रिपाला सिरीसेना ने सरकार बनाते ही भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ मुहिम छेड़ दी.

शक्तियों में कटौती

राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना के सर्मथकों ने संसद भंग करने के राष्ट्रपति के अधिकार को ख़त्म करने के पक्ष में भी वोट किया.

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अब जब तक संसद पांच साल की निर्धारित अवधि में से साढ़े चार साल पूरे नहीं कर लेती, उसे भंग नहीं किया जा सकता है.

इससे पहले राष्ट्रपति केवल एक साल बाद ही संसद को बर्खास्त कर सकते थे.

महिंदा ने पुलिस, लोक सेवा और न्यायपालिका से आगे जाकर अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए शीर्ष जजों को नियुक्त किया.

महिंदा राजपक्षे ने साल 2010 में दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के बाद दो कार्यकाल की सीमाखत्म कर दी थी और इसी साल उन्होंने तीसरी बार चुनाव लड़ा था जिसमें उन्हें सिरिसेना से शिकस्त झेलनी पड़ी.

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