'चीन से रिश्तों का असर दूसरों पर नहीं'

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श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाल सिरिसेना ने भारत और चीन के साथ संबंधो पर कहा है कि उन्हें जिससे भी ज़रूरत पड़ेगी उससे दोस्ती करेंगे.
बीबीसी सिंहला के संवाददाता सरोज पथिराना को लंदन में दिए विशेष इंटरव्यू में सिरिसेना ने कहा, "हम गुटनिरपेक्षता की नीति में विश्वास करते हैं. श्रीलंंका के संपूर्ण विकास के लिए हम विश्व के सभी देशों से मदद लेने के पक्ष में हैं. जिससे भी जरूरत पड़ेगी हम दोस्ती करेंगे."
चीन से रक्षा सौदे पर भारत की प्रतिक्रिया के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, "श्रीलंका अपने विकास के लिए किसी भी देश से इस तरह सहायता लेगा ताकि दूसरे देशों से उसके संबंध पर कोई असर ना पड़े."
सिरिसेना ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी तरह का सवाल उठने का कोई मतलब नहीं है. हम चीन के साथ जो भी समझौते करेंगे कि उसका किसी और देश पर असर नहीं पड़ने देंगे. दुनिया के तमाम देश हमारे दोस्त हैं."
युद्ध अपराध की जाँच

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श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाल सिरिसेना ने देश में गृहयुद्ध के दौरान हुए कथित युद्ध अपराधों की जांच के लिए घरेलू समिति एक महीने के भीतर बनाने की उम्मीद जताई है.
सिरिसेना ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद इस जांच समिति में संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं को शामिल नहीं किया जाएगा.
श्रीलंका में अलगाववादी तमिल टाइगर्स और सेना के बीच 26 वर्ष तक चला. यह संघर्ष साल 2009 में तब खत्म हुआ जब सेना ने अलगाववादियों को निर्णायक रूप से हरा दिया.
दोनों ही पक्षों पर इस दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगते रहे.
'निष्पक्ष जांच'

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सिरिसेना ने उम्मीद जताई है कि जांच समिति संतुलित, विधि सम्मत और निष्पक्ष तरीके से काम करेगी.
बीबीसी के दक्षिण एशिया संपादक चार्ल्स हेवीलैंड मानते हैं कि इस मामले में सिरिसेना, पूर्व विवादित राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की तुलना में थोड़ा उदार रवैया अपना रहे हैं.
उनका मानना है कि राजपक्षे जहां इस मामले में कठोर रवैया अपनाते थे, वहीं सिरिसेना संयुक्त राष्ट्र के लिए थोड़ी गुंजाइश तो छोड़ ही रहे हैं.
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