परमाणु कूटनीति में पीएचडी हैं विदेश सचिव

एस जयशंकर

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भारत सरकार ने सुजाता सिंह को हटाकर भारतीय विदेश सेवा के 1977 बैच के अधिकारी सुब्रह्मण्यम जयशंकर को नया विदेश सचिव नियुक्त किया है. उनका कार्यकाल दो साल का होगा.

जयशंकर की नियुक्ति का फ़ैसला <link type="page"><caption> प्रधानमंत्री</caption><url href="" platform="highweb"/></link> नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की नियुक्ति समिति की बैठक में लिया गया. <itemMeta>hindi/india/2015/01/150128_foreignsecy_jaishankar_ia</itemMeta> ने अपना कार्यकाल संभाल लिया है.

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सुजाता सिंह को उनका कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद से हटा दिया गया है. सुजाता सिंह को हटाने को लेकर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं.

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने ट्वीट कर कहा, ''क्या विदेश सचिव को हटाना उनका देवयानी खोबरागड़े के पक्ष में खड़े होने का देर से लिया गया बदला है. क्या अमरीकी राष्ट्रपति की यात्रा के बाद उनको हटाना केवल संयोग भर है.''

वहीं भाजपा प्रवक्ता नलिन कोहली ने कहा कि किसी की भी नियुक्त करना सरकार का अधिकार है.

जयशंकर का सफ़र

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परमाणु कूटनीति विषय में पीएचडी कर चुके डॉक्टर जयशंकर ने 2008 में भारत और अमरीका के बीच हुए असैन्य परमाणु करार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उस समय केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार थी.

जयशंकर को सितंबर 2013 में निरूपमा राव की जगह अमरीका में भारत के राजदूत नियुक्त किया गया था. वो 31 जनवरी को सेवानिवृत्त होने वाले हैं. उन्होंने दिसंबर 2013 में कार्यभार संभाला था. जयशंकर का कार्यकाल अगले दो वर्ष का होगा.

जिस समय उन्हें अमरीका भेजा गया, उस समय भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े का मामला सुर्खियों में था.

विदेश सेवा का क़रीब 36 साल का अनुभव रखने वाले जयशंकर चीन में भारत का राजदूत और सिंगापुर में उच्चायुक्त रह चुके हैं.

उन्होंने 2001 से 2004 तक चेक गणराज्य में भारत के राजदूत के रूप में भी काम किया है.

चीन का अनुभव

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जयशंकर चीन में सबसे अधिक समय तक काम करने वाले भारतीय राजदूत हैं. उनका वहां कार्यकाल क़रीब साढ़े चार साल का था.

जयशंकर भारत के मशहूर रणनीतिक विश्लेषक, समीक्षक और नौकरशाह के सुब्रह्मण्यम के बेटे हैं.

दिल्ली में पैदा हुए एस जयशंकर की स्कूली शिक्षा नई दिल्ली के एयर फ़ोर्स सेंट्रल स्कूल से हुई. उन्होंने दिल्ली के मशहूर सेंट स्टीफ़ेंस कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की.

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से राजनीति विज्ञान में एमए करने के बाद उन्होंने वहीं से अंतरराष्ट्रीय संबंध में एमफ़िल और पीचएचडी की डिग्री ली.

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