सेक्स वर्कर्स ने क्यों नेट पर डाली सेल्फ़ी

sex workers

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    • Author, बीबीसी ट्रेंडिंंग
    • पदनाम, क्या है लोकप्रिय और क्यों?

सेक्स वर्कर्स की शख्सियत आख़िर किस तरह की होती है?

ऑस्ट्रेलिया की सैकड़ों यौनकर्मी हैशटैग #facesofprostitution का इस्तेमाल करके अपने बारे में बातें बता रही हैं.

पिछले रविवार को 21 वर्ष की टिली लॉलैस ने इंस्टाग्राम पर ये सिलसिला शुरू किया. टिली इतिहास की स्नातक हैं और सेक्स वर्कर हैं.

टिली ने महिलाओं की एक लोकप्रिय ऑन लाइन पत्रिका 'मामामिया' में दोबारा प्रकाशित हुई ब्लॉग पोस्ट पर प्रतिक्रिया भेजी थी.

इसमें कहा गया था कि हॉलीवुड की मशहूर फ़िल्म प्रिटी वुमेन में दिखाया गया है कैसे एक खूबसूरत यौनकर्मी अपने प्रिंस चार्मिंग से मिलती है जबकि असल में सेक्स वर्करों की ज़िंदगी इससे कहीं बदसूरत होती है.

यौनकर्मियों की नकारात्मक छवि

हॉली-सेक्स वर्कर

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टिली लॉलेस इस बात से नाराज़ थीं कि ब्लॉग में यौनकर्मियों की ज़िंदगी को एक ही नज़रिए से देखा गया था और उन्हें नकारात्मक तौर से पेश किया गया था.

वे खुद दो साल से सेक्स वर्कर के तौर पर काम कर रही हैं. दो महीने पहले ही उन्होंने सिडनी में खुद की पहचान बतौर सेक्स वर्कर ज़ाहिर की क्योंकि सिडनी में यौनकर्मियों को कानूनी मान्यता प्राप्त है.

तब उन्होंने इंस्टाग्रम पर अपनी फोटो पोस्ट करके यौनकर्मियों का दूसरा चेहरा दिखाने का फैसला किया. एक ऐसी युवती का चेहरा जिसने सोच समझ कर सेक्स वर्कर बनने का फैसला लिया.

'सिर्फ़ हमारे शरीर की बात होती है'

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तस्वीर देखने के बाद ऑस्ट्रेलिया की सेक्स वर्कर असोसिएशन, स्कार्लेट अलाएंस ने टिली को अनुरोध किया कि वो तस्वीर को हैशटैग के साथ ट्विटर पर पोस्ट करें.

और उसके बाद से हैशटैग के साथ तस्वीरें आने का सिलसिला शुरू हुआ. सैकड़ों सेक्स वर्करों, ज़्यादातर महिलाओं, ने अपनी तस्वीरें पोस्ट कीं. उनमें से कुछ ने तो पहली बार सार्वजनिक तौर पर अपनी ये पहचान ज़ाहिर की.

टिली ने बीबीसी ट्रेंडिंग को बताया, "मुझे बहुत हैरानी और खुशी हुई. क्योंकि सेक्स वर्करों को बहुत कम ही एक व्यक्ति के तौर पर देखा जाता है. हमारे शरीर की बात अक्सर होती है. लेकिन अपने चेहरे सोशल मीडिया पर दिखाना एक प्रभावशाली बात है."

फ़िल्म पर छिड़ी बहस

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बहुत सी और सेक्स वर्करों को भी पत्रिका के मूल पोस्ट पर एतराज़ था. हॉली ने कहा कि उन्हें उस तस्वीर पर आपत्ति थी जो उस पोस्ट के साथ लगाई गई थी. वो पूर्वी यूरोप से अवैध तौर से लाई गई महिला की भयानक तस्वीर थी. हॉली कहती हैं कि कि ये तस्वीर हमारा प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती.

वहीं सेक्स वर्कर और अभिनेत्री मेडिसन मेसिना ने कहा, "वो लेख साफ़ तौर हमारे लिए अपमानजनक था क्योंकि हमें चुप करने के लिए वह लेख सेक्स तस्करी के तर्क को इस्तेमाल कर रहा है. साथ ही उससे उनकी आवाज़ें भी दब जाती हैं जो वाकई सेक्स तस्करी के पीड़ित हैं."

जबकि लेख की लेखिका लैला मिकलवेट का दावा है कि प्रिटी वुमेन नाम की फिल्म ने बहुत सी लड़कियों को यौनकर्म की तरफ खींचा और फिर उन्हें बुरे बर्ताव और पीड़ादायी अनुभवों से गुज़रना पड़ा.

उन्होंने बीबीसी ट्रेंडिंग को बताया कि सेक्स वर्करों के इस अभियान के बावजूद उन्होंने जो लिखा, वे उस पर अडिग हैं.

उनका कहना है कि कानूनी यौनकर्म ऐसा माहौल पैदा करती है जिसमें गैरकानूनी सेक्स तस्करी हो सके.

'बस चंद आवाज़ें'

लैला ने कहा, "चूंकि कुछ मुट्ठी भर आदमी और औरतों ने ट्विटर पर अपनी तस्वीरें पोस्ट करके ये कह दिया कि ये एक सशक्त करने वाला काम है, इसका मतलब ये नहीं कि ये बात पूरे कारोबार के लिए सच है."

लैला कहती हैं, "उन लोगों ने आवाज़ ज़रूर उठाई है लेकिन ये बहुत कम लोगों की आवाज़ है जो ट्विटर का इस्तेमाल कर सकते हैं और ऐसी तस्वीरें वहां पोस्ट कर सकते हैं."

टिली ने बीबीसी को बताया कि वे लेख में दिए तर्कों से अब भी नाराज़ हैं क्योंकि ये तर्क हमारी आज़ादी पर सवाल उठाते हैंं

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