तो वेश्याओं ने रोकी थीं अमरीकी फ़ौज़ें?

रेड लाइट एरिया

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    • Author, स्टीफन इवांस
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, बर्लिन

अमरीकी सैन्य बेस के पास काम कर चुकीं 120 से अधिक वेश्याएं दक्षिण कोरियाई सरकार से मुआवज़ा वसूलने के लिए अदालत जाने की तैयारी में हैं.

उनका कहना है कि दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने अमरीकी फ़ौजों को खुश करने के लिए उनका इस्तेमाल किया और अब जब वो बूढ़ी हो गई हैं, उन्हें ग़रीबी में छोड़ दिया गया है.

1970 के दशक में दक्षिण कोरिया की गिनती ग़रीब देशों में होती थी. बड़ी संख्या में महिलाएं आजीविका के लिए वेश्यावृत्ति के पेशे में थीं.

कुछ वेश्याओं ने आरोप लगाया है कि दक्षिण कोरिया सरकार की शह पर ही वे अमरीकी शिविरों के पास जाती थीं.

क्या है मामला, पढ़ें स्टीफन इवांस की रिपोर्ट

वे रात होने से पहले अमरीकी बेस की दीवारों के पास पहुंच जाती थीं, संगीत पर नाचती-झूमती और सुबह होने से पहले लौट आती थीं.

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बुढ़ापे की दहलीज़ पर पहुंच चुकी इन 120 से अधिक वेश्याओं की माली हालत बहुत ख़राब है. यही वजह है कि अब वे न केवल अमरीकी बल्कि अपनी सरकार से भी मुआवज़ा मांग रही हैं. उनकी मांग दोनों सरकारों से 10-10 हज़ार डॉलर की है.

यूजेंगबु शहर के अमरीकी बेस के पास के सामुदायिक केंद्र में इनमें से कुछ वेश्याएं इकट्ठा हैं और अपना मामला समझा रही हैं. "हमने पूरी-पूरी रात काम किया. मैं चाहती हूं कि कोरियाई सरकार माने कि उनकी व्यवस्था के चलते ये सब हुआ..और मुआवजा भी चाहिए."

उनकी दलील यह नहीं है कि दक्षिण कोरिया सरकार ने उन पर वेश्यावृत्ति का दबाव डाला, बल्कि उनका कहना है कि अधिकारियों ने एक व्यवस्था बनाई और उनकी नियमित स्वास्थ्य जांच हुई.

उन्हें अंग्रेज़ी सिखाई गई और पश्चिमी तौर-तरीक़े बताए गए. यह व्यवस्था ख़राब थी और इसका ही नतीजा रहा कि वे अब ग़रीबी में जी रही हैं.

वेश्यावृत्ति का कुचक्र

ये महिलाएं कहती हैं कि वे वेश्यावृत्ति के लिए इसलिए मजबूर हुईं क्योंकि वे ग़रीब थीं. नौकरी पाने की चाह में वे बार और वेश्यालयों तक पहुंचीं और कुचक्र में फंस गईं.

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एक महिला ने बताया, "1972 में मैं एक सेवायोजन केंद्र पर गई थी. वहां के काउंसलर ने मुझे खड़े होने और बैठने को कहा. उसने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा और मुझे ऐसी नौकरी देने का वादा किया, जहां मुझे रहने की जगह और खाना मिलता. बस मुझे काम करना था और मेरे रहने और खाने-पीने की ज़िम्मेदारी मेरे बॉस की थी."

उनमें से कुछ की दलील तो यह भी थी कि अधिकारियों ने रणनीति के तहत ऐसा करने की रजामंदी दी, क्योंकि देश को विदेशी मुद्रा की ज़रूरत थी. वेश्याओं को बुरा माना गया, लेकिन उनके कमाए डॉलर्स का स्वागत किया गया.

गुस्से में उनकी आवाज़ कभी तेज़ हो जाती है तो अपनी दास्तां सुनाते हुए उनका गला रुंध जाता है.

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लुसी विलियमसन लिखती हैं कि कभी दक्षिण कोरिया के बारे में पूरे यक़ीन के साथ कहा जाता था कि उनके बच्चे अपने बुजुर्गों का ख़्याल रखते हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं है.

कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपनी जवानी देश की अर्थव्यवस्था सुधारने में लगा दी. अब वो देख रहे हैं कि नई पीढ़ी अपने ख़र्चों की प्राथमिकता बदल रही है. नतीजा यह है कि कुछ बड़ी उम्र की महिलाएं वेश्यावृत्ति में उतर रही हैं.

अलग-अलग दास्तां

एक महिला कहती हैं, "मैंने एक क्लब में नौकरी करना मंज़ूर किया. जैसे ही मैं पहुंची, मुझे भागना पड़ा. क्लब का मालिक मुझे पकड़ने में कामयाब रहा और उसने मुझे किसी दूसरे को बेच दिया और वहां मुझे अपना पहला ग्राहक मिला."

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दरअसल, 1970 के दशक में दक्षिण कोरिया को डर था कि अमरीका वहां से अपनी फ़ौजें न हटा ले.

वेश्याओं और दक्षिण कोरिया में अमरीकी सेना पर अध्ययन करने वाली डॉक्टर कैथी मून कहती हैं, "अमरीकी सैन्य कमांड को खुश रखना प्राथमिकता थी ताकि वे कोरिया में रुके रहें क्योंकि आशंका थी कि अमरीकी फ़ौजें वहां से हट सकती हैं."

बदले हालात

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अब हालात पहले जैसे नहीं रहे. अमरीकी सेना ने सैनिकों के वेश्याओं के पास जाने की 'ज़ीरो टोलरेंस' नीति बनाई है. यानी सैनिक वेश्याओं के पास नहीं जा सकते.

मिलिट्री पुलिस अक्सर रेडलाइट इलाक़ों पर छापे डालती है और बार पर भी नज़र रखती है. दक्षिण कोरिया भी पहले की तरह ग़रीब नहीं रहा और तेज़ी से उभरती आर्थिक शक्तियों में से एक है.

यही नहीं, दक्षिण कोरिया ने 2004 में वेश्यावृत्ति को ग़ैरक़ानूनी बना दिया है.

लेकिन इससे उन वेश्याओं का दर्द कम नहीं हो जाता जो अब बूढ़ी हो चुकी हैं और ग़रीबी में जी रही हैं.

जान योंग मी

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जान योंग मी की उम्र 60 साल से अधिक है और वह एक छोटे से एक कमरे के मकान में अपने तीन कुत्तों के साथ रहती हैं.

उन्होंने अमरीकी शिविरों के पास कैंप-टाउन में 20 साल तक काम किया और अब दिखाने के लिए उनके पास सिर्फ़ ग़रीबी है.

वह कहती हैं, "शायद क्योंकि मैंने इतना लंबा समय अमरीकी सैनिकों के साथ गुजारा, मैं अब कोरियाई लोगों के लिए फ़िट नहीं हूं."

वह सवाल करती हैं, "मेरी ज़िंदगी इस तरह क्यों बदली?"

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