नेपाल में नहीं वापस होगी फांसी की सज़ा

नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला ने देश में मृत्यु दंड की व्यवस्था फिर से शुरू करने से इंकार कर दिया है.
छह साल की एक बच्ची के साथ बलात्कार और रविवार को हुई उसकी मौत के बाद लोगों के बढ़े गुस्से के बीच यह मांग की जा रही है कि मृत्यु दंड एक बार फिर से शुरू की जाए.
नेपाल में 1951 में राणाशाही के ख़ात्मे और लोकतांत्रिक व्यवस्था शुरू होने के बाद से अब तक किसी को मृत्यु दंड नहीं दिया गया है. वर्ष 1990 में आधिकारिक रूप से मृत्यु दंड खत्म कर दिया गया.
संधियों का उल्लंघन

बच्ची के माता पिता ने उसका अंतिम संस्कार करने से यह कह कर इंकार कर दिया कि अभियुक्त को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाए और उनकी सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम किए जाएं.
इसके साथ ही कई लोगों ने इस तरह के अपराध साबित होने पर मृत्यु दंड देने की मांग की है.
कोइराला ने पीड़ित के माता पिता को आश्वस्त किया कि दोषी को निश्चित तौर पर कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाएगी.
मगर उन्होंने इसके साथ ही मृत्यु दंड बहाल करने से साफ़ इंकार कर दिया. उन्होंने इसका कारण बताते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन होगा.
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