बीजिंग में बुजुर्गों की उपेक्षा अपराध

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- Author, बीबीसी मॉनिटरिंग सेवा
- पदनाम, क्या चर्चित है और क्यों?
चीन की राजधानी बीजिंग में बुज़ुर्गों की सेवा और देखभाल करना क़ानूनी तौर पर ज़रूरी कर दिया गया है. ऐसा न करना ज़ुर्म माना जाएगा और इसके लिए सज़ा भी दी जाएगी.
चीन सरकार की समाजार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक़, "बीजिंग म्युनिसपल पीपल्स कांग्रेस की स्थाई समिति ने एक विधेयक पास कर कहा है कि बच्चों के लिए ज़रूरी होगा कि वे अपने बूढ़े माता पिता की देख भाल करें. यह क़ानून एक मई से लागू होगा."
इस विधेयक के अनुसार के अनुसार बुज़ुर्गों को अध्यात्मिक सांत्वना देना भी बच्चों की ही ज़िम्मेदारी होगी.
सरकार देगी मदद

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विधेयक में यह व्यवस्था भी है कि सरकार इस काम के लिए लोगों को आर्थिक मदद भी देगी. कम आमदनी वाले लोगों को सरकार कुछ पैसे देगी.
इसके अलावा किसी तरह की अपंगता वाले बुज़ुर्गों की देखभाल के लिए भी सरकार सब्सिडी देगी.
सरकार ने बुज़ुर्गों की देखभाल के लिए बनने वाले सामुदायिक केंद्रों और अस्पतालों को भी अनुदान देने का एलान किया है.
बुज़ुर्गों की तादाद

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बीजिंग में बुज़ुर्गों की तादाद कुल आबादी का लगभग छह फ़ीसदी है. पिछले साल शहर में तीस लाख से ज़्यादा बुज़ुर्ग थे.
वर्ष 2020 तक इनकी तादाद बढ़ कर चालीस लाख हो जाने की संभावना है.
चीन में 60 वर्ष से अधिक की उम्र के लोगों की संख्या फ़िलहाल 20 करोड़ है. यह देश की कुल जनसंख्या का तक़रीबन 14 प्रतिशत है.
वर्ष 2050 तक यह तादाद बढ़ कर 40 करोड़ होने की संभावना है. चीन में 90 फ़ीसदी से ज़्यादा लोग घरों में बच्चों के साथ रहते हुए सरकारी पेंशन लेना पसंद करते हैं.
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