जर्मनीः इस्लाम विरोधी-समर्थकों का प्रदर्शन

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यूरोप के कथित 'इस्लामीकरण' के ख़िलाफ़ इस्लाम विरोधियों और इस्लाम समर्थकों ने जर्मनी में जगह जगह भारी संख्या में प्रदर्शन किया है.
पेगिडा यानि "पैट्रियोटिक यूरोपियन्स अगेंस्ट द इस्लामाइज़ेशन ऑफ़ द वेस्ट" आंदोलन के तहत अक्तूबर से हर हफ़्ते विरोध प्रदर्शन जारी हैं.
जर्मनी की चांसलर एंगेला मैर्कल ने नए साल के अवसर पर अपने भाषण में पेगिडा आंदोलनकारियों पर सवाल उठाया और कहा कि इसके नेता 'पूर्वाग्रह, नफ़रत और उदासीनता' के शिकार हैं.
जवाब में पेगिडा की समन्वयक कैथ्रीन ओरटेल ने <link type="page"><caption> ड्रेसडेन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/12/141216_germany_islamisation_pegida_sk.shtml" platform="highweb"/></link> में कहा कि जर्मनी एक बार फिर से 'राजनीतिक दमन' के दौर से गुज़र रहा है.
समर्थन-विरोध

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सोमवार को पूर्वी जर्मनी के शहर ड्रेसडेन में पेगिडा समर्थकों की एक रैली हुई जिसमें क़रीब 18,000 लोगों की भारी भीड़ ने हिस्सा लिया.
इस रैली के विरोध में भी कई प्रदर्शन हुए.
हज़ारों की तादाद लोगों ने बर्लिन, कोलोंग, ड्रेसडेन और स्टूअट्टगार्ट इलाक़ों में जुलूस निकाला.
पुलिस का कहना है कि बर्लिन में पेगिडा आंदोलन के विरोध में क़रीब 5,000 लोग सड़कों पर निकल आए और सैंकड़ों की संख्या में प्रदर्शन कर रहे पेगिडा समर्थकों का रास्ता जाम कर दिया.
समाचार एजेंसी डीपीएस ने बताया कि स्टूअट्गर्ट, मुएन्सटर और हैमबर्ग में क़रीब 22,000 पेगिडा विरोधियों ने रैली निकाली.

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पुलिस ने ये भी बताया कि ड्रेसडेन शहर में केवल एक 'आप्रवासन विरोधी रैली' में 18,000 लोग शामिल हुए जबकि इसके विरोध में 3,000 लोगों ने प्रदर्शन किया.
गिरिजाघर की लाइट
कोलोन शहर में तो अधिकारियों ने पेगिडा समर्थकों के विरोध में गिरजाघर की लाइट तक बंद कर दी.

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गिरजाघर के डीन नोबर्ट फ़ेलडॉफ़ ने बीबीसी को बताया, "उनका विरोध सही नहीं है. हम रूढ़िवादी इसाइयों को आगाह करना चाहते हैं कि वे क्या कर रहे हैं."
समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक़ कोलोन के सिटी सेंटर की बड़ी इमारतों और पुलों की रोशनी बंद कर दिए जाने के कारण पूरा इलाक़ा अंधेरे में डूब गया.

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जर्मनी में किसी भी दूसरे यूरोपीय देश के मुकाबले बड़ी संख्या में लोगों ने शरण ले रखी है.
यहां के शरणार्थियों में अधिकांश युद्ध से जूझ रहे सीरिया से आए हुए लोग हैं.
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