आपके दिमाग को बदल रहा है स्मार्टफ़ोन?

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- Author, माइकेल रॉबर्ट
- पदनाम, स्वास्थ्य संपादक, बीबीसी न्यूज ऑनलाइन
टच स्क्रीन स्मार्टफ़ोन हमारे दिमाग को खुद के मुताबिक ढाल रहा है.
यह बात एक शोध में सामने आई है.
वैज्ञानिकों ने दिमाग की गतिविधि को मापने के लिए इलेक्ट्रो एनसिफ़ैलोग्राफ़ी (ईईजी) का इस्तेमाल किया और स्मार्टफ़ोन और परम्परागत मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करने वालों के बीच साफ़ अंतर पाया.
ईईजी रीडिंग के आधार पर पता चला कि स्मार्टफ़ोन इस्तेमाल करने वालों की अंगुलियां और अंगूठे अधिक अभ्यस्त हो जाते हैं.
शोध में शामिल करीब 37 में 26 वॉलेन्टियर्स के पास स्मार्टफ़ोन था जबकि 11 के पास पुराने किस्म के साधारण मोबाइल फ़ोन थे.
ईईजी से दिमाग और हाथों के बीच नर्व्स से भेजे गए विद्युत संदेशों रिकॉर्ड करती है.
बदलाव

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वॉलेन्टियर के सिर पर कई इलेक्ट्रोड लगाए गए थे, ताकि दिमागी हरकतों को रिकॉर्ड किया जा सके.
इसके जरिए शोधकर्ता यह पता लगाने में सफल रहे कि दिमाग के कितने टिश्यू किसी खास अंग के प्रति अधिक संवेदनशील रहते हैं.
अध्ययन के नतीजों से पता चला कि स्मार्टफ़ोन इस्तेमाल करने वाले व्यक्तियों के अंगूठे, तर्जनी और मध्य अंगुलियों पर, जब यांत्रिक स्पर्श किया गया तो ईईजी ने उनके दिमाग में ज़्यादा सक्रियता दर्ज की.
इससे यह भी पता चला कि उन्होंने जितना ही अपने टच स्क्रीन को इस्तेमाल किया, उनका दिमाग उतना सक्रिय रहा. इस शोध को ' करेंट बायोलॉजी' जर्नल में प्रकाशित किया गया है.
यूनिवर्टसिटी ऑफ़ ज्यूरिख़ के इंस्टीट्यूट ऑफ़ न्यूरोइन्फॉरमेटिक्स से जुड़े और इस शोध के लेखक आर्को घोष कहते हैं, "मैं इस बात से वाकई हैरत में हूं कि स्मार्टफ़ोन के इस्तेमाल ने इतने बड़े पैमाने पर बदलाव किया है."
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