पाकिस्तान: लखवी फिर से गिरफ़्तार

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पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि मुंबई हमले के मुख्य अभियुक्त ज़कीउर रहमान लखवी को रिहाई के आदेश के बाद दोबारा गिरफ़्तार किया गया है.
अडियाला जेल के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि हाई कोर्ट के आदेश को मानते हुए लखवी को नज़रबंदी से रिहा कर दिया गया था.
लेकिन इस्लामाबाद पुलिस उन्हें एक दूसरे मामले में गिरफ़्तार किया और उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर ले गई है. उन्हें आज इस्लामाबाद की एक स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा.
पुलिस के अनुसार लखवी को इस्लामाबाद के एक थाने में आतंकवाद निरोधी क़ानून के तहत दर्ज एक मामले में गिरफ़्तार किया गया है. पुलिस ने इस बारे में और कोई जानकारी नहीं दी है.

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लखवी पर 9/11 के मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड होने का आरोप है. पिछले गुरुवार को उन्हें इस्लामाबाद की आतंकवाद निरोधक अदालत ने ज़मानत दी थी. लेकिन सरकार ने उन्हें तीन महीने के लिए नज़रबंद कर दिया था. इस पर लखवी के वकील हाई कोर्ट चले गए और कोर्ट ने उन्हें रिहा करने का आदेश दिया.
'कारण नहीं बताए'
सोमवार को हाइकोर्ट ने लखवी को तीन महीने के लिए नज़रबंद करने के पाकिस्तान सरकार के फ़ैसले को रद्द किया था.
हाइकोर्ट के जज जस्टिस नूर उल हक़ क़ुरैशी ने अपने फ़ैसले में कहा था कि केंद्र सरकार 29 दिसंबर को जवाब दाख़िल करने की बजाए अदालत से और समय मांग रही थी लेकिन ये नहीं बता रही थी कि उन्हें किन कारणों से और समय की दरकार है.
उधर भारत ने पाकिस्तान में अदालत की ओर से लखवी की नज़रबंदी के आदेश को ख़ारिज किए जाने पर सख़्त चिंता जताई थी.

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भारतीय विदेश मंत्रालय ने दिल्ली स्थित पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब कर अपना विरोध दर्ज कराया था.
पाकिस्तान सरकार ने पिछले हफ़्ते लखवी की ज़मानत मंज़ूर होने के बाद शांति भंग होने की आशंका के तहत लखवी को रावलपिंडी की अडियाला जेल में नज़रबंद किया था.
'मुख्य साज़िशकर्ता'
भारत में लखवी पर वर्ष 2008 में हुए मुंबई हमलों की साज़िश रचने का आरोप लगा है.
मुंबई की विशेष अदालत ने वर्ष 2009 में हमलों के संबंध में जिन लोगों के ख़िलाफ़ ग़ैर ज़मानती वारंट जारी किया था उनमें <link type="page"><caption> लश्करे तैय्यबा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/southasia/2010/12/101205_wiki_let_lakhwi_as" platform="highweb"/></link> के प्रमुख हाफ़िज़ मोहम्मद सईद और लखवी भी शामिल थे.
लखवी को ज़मानत दिए जाने का भारत ने कड़ा विरोध किया था.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरूद्दीन ने पत्रकारों से कहा था, "लखवी को ज़मानत देना उन आतंकवादियों के लिए एक तरह से भरोसा देने वाली बात है जो इस तरह के जघन्य अपराध करते हैं. आतंकवाद को लेकर इस तरह का सिलेक्टिव रवैया नहीं होना चाहिए."
लखवी के वकील रिज़वान अब्बासी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से गुरुवार को कहा था, "हमने दस दिसंबर को पाकिस्तान में आतंक निरोधी अदालत में ज़मानत की याचिका दायर की थी. दोनों पक्ष की दलीलें सुनने के बाद जज ने ज़मानत देने का फ़ैसला किया."
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