पाकिस्तान आज भी आतंकी गुटों की पनाहगाह: भारत

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मुंबई हमलों के मामले में अभियुक्त ज़की उर्रहमान लखवी की नज़रबंदी हटाने के कोर्ट के फैसले पर भारत ने पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब किया है.
इस्लमाबाद हाईकोर्ट ने पाकिस्तानी हुकूमत के उस आदेश को ख़ारिज कर दिया है जिसके तहत लखवी को नज़रबंद करने का फ़ैसला लिया गया था.
पाकिस्तानी उच्चायुक्त को सोमवार को भारतीय विदेश मंत्रालय तलब किया गया.
विदेश मंत्रालय की विज्ञप्ति के मुताबिक ,"भारत की विदेश सचिव सुजाता सिंह ने लखवी मामले पर पाकिस्तान प्रशासन की ओर से कदम न उठाने पर नाखुशी जताई है. ये बात दोहराई गई कि भारत उम्मीद करता है कि मुंबई हमलों के लिए दोषी लोगों को सज़ा दिलाने के सिलसिले में जो वादे किए गए हैं वो पाकिस्तान निभाएगा."

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विज्ञप्ति में कहा गया है, "ये बहुत चिंताजनक है कि पिछले छह सालों से दिए आश्वासनों और पाकिस्तान में हाल में हुई दुखद घटनाओं के बावजूद पाकिस्तान आज भी आतंकवादी गुटों की पनाहगाह बना हुआ है."
न्यायधीश नुरूल हक़ क़ुरैशी ने आपने आदेश में लिखा है कि सरकार अदालत के सवालों का जवाब देने की बजाय और वक़्त मांग रही है. लेकिन यह नहीं बता रही है कि उसे और अधिक वक़्त की दरकार किस वजह से है.
सरकारी वकील का कहना था कि सरकार दूसरे अहम मामलों में उलझी रही जिसकी वजह से वह जवाब दाख़िल नहीं करवा सकी और इसलिए उसे और समय चाहिए.
'फ़ैसले को चुनौती नहीं'

ज़की उर्रहमान लखवी के वकील ने उनकी नज़रबंदी के आदेश को 26 दिसंबर को चुनौती दी थी. इस पर कोर्ट ने सरकार को 29 दिसंबर तक जवाब देने को कहा था.
अदालत ने मुलज़िम को दस लाख रुपये का मुचलका जमा करवाने का हुक्म दिया है. साथ ही कहा है कि वह यक़ीन दिलवाएं कि वह मुंबई हमले से जुड़ी सभी सुनवाइयों में हाज़िर रहेंगे.
क़ानून के कई जानकारों का मानना है कि मुचलका जमा करवाने के बाद लखवी की रिहाई में किसी तरह की रुकावट नहीं रह जाएगी.
हाल ही में लखवी की ज़मानत मंज़ूर होने के बाद स्थाीनय प्रशासन ने उन्हें अमन शांति के लिए ख़तरा बताते हुए नज़रबंद करने का हुक्म जारी किया था. उन्हें रावलपिंडी जेल में रखा गया है.
भारतीय हूकूमत ने पाकिस्तान की सरकार से आग्रह किया था कि अदालत के फ़ैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दे.
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